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घर के मुख्य द्वार पर तोरण लगाना शुभ क्यों माना जाता है? परंपरा के पीछे छिपे हैं कई धार्मिक महत्व

Published: Tue, 13 Oct 2026 08:30 PM (IST)

भारतीय संस्कृति में घर के मुख्य द्वार पर तोरण लगाना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि ...और पढ़ें

तोरण लगाने के धार्मिक महत्व और वास्तु लाभ (Picture Credit: AI Generated)

तोरण लगाने के धार्मिक महत्व और वास्तु लाभ (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. तोरण घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश कराता है।

  2. यह बुरी शक्तियों और नकारात्मकता को दूर रखता है।

  3. तोरण लगाने से माता लक्ष्मी की कृपा मिलती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में घर के मुख्य द्वार को खास माना गया है। ऐसी मान्यता है कि मुख्य द्वार से ही सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रवेश होता है। इसी वजह है कि त्योहारों, विवाह और अन्य शुभ अवसरों पर घर के दरवाजे को सजाने के लिए तोरण या वंदनवार लगाया जाता है।

आपने अक्सर घरों के प्रवेश द्वार पर आम या अशोक के पत्तों, गेंदे के फूलों या अन्य सजावटी सामग्रियों से बने तोरण देखे होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस परंपरा के पीछे कई धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं?

हिंदू धर्म में तोरण को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर तोरण लगाने से वातावरण में सकारात्मकता बनी रहती है और नकारात्मकता दूर रखने की कामना की जाती है। इसे देवी-देवताओं के स्वागत और घर में सुख-समृद्धि के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। आइए आपको बताते हैं इसके महत्व और लाभों के बारे में।

तोरण लगाने से बुरी ताकतें दूर रहती हैं

घर की एनर्जी को बैलेंस करने के लिए मुख्य द्वार पर लगने वाले तोरण अहम भूमिका निभाते हैं। कहा जाता है कि मुख्य द्वार पर तोरण लगाने से किसी भी तरह की नेगेटिव एनर्जी दूर रहती हैं। यही नहीं इससे बुरी नजर से भी बचने में मदद मिलती है। यह घर से किसी भी तरह के वास्तु दोष को दूर करने में मदद करता है।

माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है

जब आप घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाते हैं तो यह माता लक्ष्मी की कृपा पाने का एक आसान तरीका माना जाता है। इसके पीछे एक मुख्य उद्देश्य धन की देवी, माता लक्ष्मी का ध्यान आकर्षित करना होता है। आम के पेड़ के पत्तों को माता लक्ष्मी, गोवर्धन और गंधर्व जैसे देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। इसलिए इस तोरण को अत्यंत शुभ माना जाता है।

सदियों से चली आ रही परंपरा

'तोरण' शब्द संस्कृत शब्द 'तोरण' से बना है और इसे तमिल में 'तोरणम' और हिंदी में 'वंदनवार' के नाम से भी जाना जाता है। दरवाजे पर लटकने वाली यह सजावट किसी भी घर के मुख्य दरवाजों के लिए सबसे पसंदीदा सजावट मानी जाती थी और इसे गेंदे के फूलों और आम के पत्तों से सजाया जाता था। इसलिए, पारंपरिक घर की सजावट की इस पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाना हमारी संस्कृति के प्रति सम्मान दिखाने का एक अच्छा तरीका है।

घर के मुख्य द्वार पर आम और अशोक के पत्तों का तोरण लगाना अत्यंत शुभ होता है और यह किसी भी स्थान को ऊर्जा को सकारात्मक बना सकता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।