घर के मंदिर में भूलकर भी न बिछाएं इस रंग का आसन! सुख-समृद्धि के लिए वास्तु के इन नियमों का करें पालन
घर के मंदिर में आसन के रंगों का वास्तु के अनुसार चुनाव महत्वपूर्ण है, जो सकारात्मक ऊर्जा लाता है। काले ...और पढ़ें

घर के मंदिर में आसन के लिए सही रंग चुनें वास्तु के अनुसार (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
मंदिर में काले और नीले रंग के आसन से बचें।
लाल और पीले रंग के आसन सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।
वास्तु अनुसार आसन से पूजा में एकाग्रता बढ़ती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। घर में रखी हुई हर चीज के लिए सही वास्तु का होना जरूरी होता है। मुख्य रूप से जब हम घर के मंदिर में कुछ चीजें रखते हैं तो ये वास्तु नियमों के अनुरूप ही होनी चाहिए जिससे दैवीय कृपा बनी रहे।
ऐसे ही आप घर के मंदिर में जिस रंग के कपड़े बिछाते हैं और जिस आसान में बैठकर पूजा करते हैं उसके लिए भी सही रंगों का इस्तेमाल करना जरूरी माना जाता है। मंदिर में बिछाए जाने वाले कपड़े न सिर्फ मंदिर की सजावट के लिए अच्छे माने जाते हैं बल्कि भक्तों का मन पूजा में आकर्षित करने में भी मदद करते हैं।
आइए आपको बताते हैं आपको मंदिर में कौन से रंग के कपड़ों का भूलकर भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और किन रंगों से सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में मदद मिलती है।
मंदिर के आसन के लिए शुभ रंग
घर के मंदिर में कुछ शुभ रंगों का इस्तेमाल करने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और घर के वातावरण पर भी इसका अच्छा प्रभाव होता है। कुछ ऐसे रंग हैं जिनका इस्तेमाल मंदिर के आसान के रूप में करना सबसे शुभ हो सकता है।
लाल रंग का करें इस्तेमाल
अगर आप मंदिर में देवताओं की मूर्तियों को स्थापित करने के लिए लाल रंग के आसान का इस्तेमाल करते हैं तो यह बहुत शुभ माना जाता है। इस रंग को माता दुर्गा, हनुमान जी और समस्त देवियों से जोड़ा जाता है। अगर आप पूजा के आसन के लिए भी इसी रंग का प्रयोग करें तो बहुत शुभ होता है।
लाल रंग को मंगल से जोड़ा जाता है, इसलिए जब इस रंग के कपड़े का प्रयोग मंदिर में आसन के रूप में किया जाता है तो यह सकारात्मक ऊर्जा का कारण बनता है।
पूजा में पीले रंग के वस्त्रों का करें इस्तेमाल
पीले रंग को विष्णु जी का प्रिय रंग माना जाता है, इसलिए मंदिर में आसन के रूप में इसी रंग का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इससे आपके मंदिर का वातावरण शुद्ध होता है और पूरे घर का वातावरण भी पवित्र बना रहता है। इसके स्थान पर आप नारंगी या गुलाबी और हरे रंग के आसनों का इस्तेमाल भी घर के मंदिर में कर सकते हैं।
मंदिर में किस रंग का आसन नहीं बिछाना चाहिए
जिस प्रकार कुछ शुभ रंग मंदिर की ऊर्जा को बढ़ाते हैं। ठीक उसी तरह मंदिर में आसन के रूप में कुछ विशेष रंगों का इस्तेमाल करने से मना किया जाता है।
काले रंग का न करें इस्तेमाल
आपको मंदिर में आसन के रूप में और पूजा के लिए जो आसन इस्तेमाल करते हैं उसमें कभी भी काले रंग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
काला रंग नकारात्मकता का प्रतीक होता है और राहु और शनि की ऊर्जा को बढ़ाता है। इससे आपका पूजा में मन नहीं लगता है और एकाग्रता बनाने में भी परेशानी आती है।
नीले रंग का न करें इस्तेमाल
आपको मंदिर के आसन के रूप में नीले रंग का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से मंदिर की ऊर्जा प्रभावित होती है और पूजा पूर्ण फल नहीं मिलता है। इस रंग को भी शनि का रंग माना जाता है जिससे शनि की ऊर्जा का प्रवाह होता है।
इन रंगों के साथ ही आपको मंदिर में ऐसे रंगों का इस्तेमाल भी करने से बचना चाहिए जो बहुत ज्यादा भड़काऊ हों। भूलकर भी फटे-पुराने आसन का इस्तेमाल आप घर के मंदिर के लिए न करें और यदि किसी वजह से मंदिर का कपड़ा पूजा करते समय दीये या अगरबत्ती से जल जाए तो उसे भी तुरंत बदल दें। इन नियमों का पालन करके आपको घर के मंदिर में पूजा का पूर्ण फल मिलता है।
यह भी पढ़ें- सावधान! घर के मंदिर में भूलकर भी न करें वास्तु से जुड़ी ये 4 गलतियां, रुक जाएगी तरक्की
यह भी पढ़ें- घर के मंदिर में खंडित मूर्ति क्यों नहीं रखनी चाहिए, भगवान की प्रतिमा हाथ से गिरकर टूट जाए तो क्या करें?
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
