यमुना में स्नान से कटते हैं पाप, फिर घर में क्यों नहीं रखते इसका जल? 90% लोग नहीं जानते यमराज से जुड़ा ये सच
यमुना नदी का जल स्नान के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, जिससे पापों का नाश होता है, लेकिन इसे ...और पढ़ें

यमुना जल घर में क्यों नहीं रखते, जानें यमराज से जुड़ा रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
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यमुना स्नान से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति।
यमराज से संबंध के कारण यमुना जल घर में नहीं रखते।
भाई दूज पर यमुना स्नान अकाल मृत्यु भय मिटाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में नदियों को केवल जल का स्रोत नहीं माना जाता है बल्कि ये सनातन धर्म की गहरी आस्था और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक भी हैं। सदियों से ही नदियों को माता की तरह से पूजा जाता है और गंगा की तरह यमुना नदी का भी विशेष धार्मिक महत्व है।
अक्सर देखा जाता है कि घर में किसी भी चीज की शुद्धि के लिए गंगाजल का इस्तेमाल होता है। वहीं यमुना में स्नान करने से भी पापों से मुक्ति मिलती है और अकाल मृत्यु का भय कम हो जाता है।
वहीं अक्सर ऐसा सुनने में आता है कि गंगाजल को तो घर में रखना शुभ है, लेकिन यमुना जल को घर में नहीं रखना चाहिए। इसके पीछे यमराज और यमुना जी से जुड़ी एक प्रचलित धार्मिक मान्यता भी है। आइए आपको बताते हैं इसके बारे में।
घर में क्यों नहीं रखा जाता यमुना का जल
शास्त्रों की मानें तो यमुना नदी को अत्यंत पवित्र माना गया है और नदियों के रूप में इन्हें पूजा जाता है, लेकिन इसके जल को घर में रखना अशुभ जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाएं यमुना जी के तट पर ही की थीं। इस वजह से यमुना जी को श्री कृष्ण की चौथी पटरानी भी कहा जाता है। श्री कृष्ण ने यमुना जी को हमेशा अपने चरणों में निवास करने का वरदान दिया था। इसी वजह से इसका जल किसी अन्य स्थान पर नहीं रुकता है और घर में इसे लाने मना किया जाता है।
यमुना जी का यमराज से है संबंध
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यमुना जी सूर्यदेव और देवी संज्ञा की संतान हैं। उनके भाई यमराज हैं, जिन्हें मृत्यु और धर्म का देवता माना जाता है। इसी कारण यमुना जी को यमराज की बहन और सूर्यदेव की पुत्री के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक परंपरा में यमुना जी को कालिंदी के नाम से भी जाना जाता है।
यमुना के जल को घर में ना रखने के पीछे एक और कारण यह है कि पुराणों में बताया गया है कि यमुना में यम का वास है। यमराज जी यमुना माता के भाई हैं। इसी वजह से यमुना का जल घर में नहीं रखा जाता है, जिससे यम का वास घर में न हो। हालांकि, यदि यमुना स्नान की बात करें तो इस नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ होता है और यह समस्त पापों का नाश करने वाले है।
यमुना स्नान का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमुना में श्रद्धापूर्वक स्नान करने से मन की शुद्धि आती है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से यम द्वितीया यानी भाई दूज के दिन यमुना स्नान का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है और इस दिन यमुना नदी में स्नान करने वाले को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
शास्त्रों में लिखी बातों के अनुसार यदि आप यमुना नदी का जल घर में न भी रखें तब भी आपको यमुना में स्नान जरूर करना चाहिए। इससे मानसिक और शारीरिक शुद्धि होती है।
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