विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

एक हाथ से प्रसाद लेना क्यों है गलत? जानिए दोनों हाथों से इसे ग्रहण करने के पीछे का नियम

Published: Sat, 11 Jul 2026 10:12 AM (GMT+05:30)

हिंदू धर्म में प्रसाद को ईश्वरीय आशीर्वाद माना जाता है, जिसे दोनों हाथों से ग्रहण करना विनम्रता, कृतज्ञता और ईश्वर के प्रति समर्पण दर्शाता है।

प्रसाद दोनों हाथ से ही क्यों लिया जाता है? (Picture Credits- AI Image)

प्रसाद दोनों हाथ से ही क्यों लिया जाता है? (Picture Credits- AI Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रसाद को सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि एक ईश्वरीय आशीर्वाद माना जाता है। हिंदू धर्म में प्रसाद पहले भगवान को अर्पित किया जाता है और फिर इसके बाद भक्तों को प्रसाद के रूप में खाने को दिया जाता है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि, प्रसाद दोनों हाथों से ही क्यों लिया जाता है? आइए समझते हैं इसके पीछे का धार्मिक मत क्या है?

किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या मंदिर में जब हम दोनों से हाथों से प्रसाद को ग्रहण करते हैं, तो यह भाव विनम्रता, कृतज्ञता और ईश्वर के प्रति समर्पण को दर्शाता है। प्रसाद लेने के लिए दोनों हाथों का इस्तेमाल सम्मान का प्रतीक है।

दोनों हाथों का उपयोग सम्मान दर्शाता है।

यह दिखाता है कि हम कोई साधारण चीज़ नहीं ले रहे हैं, बल्कि श्रद्धा के साथ पवित्र ऊर्जा को स्वीकार कर रहे हैं। आध्यात्मिक रूप से, यह खुले दिल और संतुलित भावना के साथ आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रतीक है।

जब हम प्रसाद लेने के लिए दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हैं, तो हमारा पूरा ध्यान प्रसाद पर रहता है। अक्सर एक हाथ जल्दबाजी को दर्शाता है। दोनों हाथों से प्रसाद लेते वक्त ध्यान, संतुलन और आभार की भावना जागृत होती है।

जब हम पूजा-पाठ करते हैं, तो शरीर मन का मार्गदर्शन करता है। एक सम्मानजनक हाव-भाव मन को यह समझने में सहायता करता है कि, जो मिल रहा है वह अत्यंत पवित्र है। प्रसाद को दोनों हाथों से लिया जाता है, क्योंकि मन को स्मरण रहे कि, विनम्रता और जागरूकता के साथ आशीर्वाद लेना जरूरी है।

दोनों हाथों से प्रसाद क्यों लिया जाता है

प्रसाद लेते समय किन बातों का रखें खास ध्यान?

कई बार लोग जल्दबाजी में या ध्यान न रहने पर एक हाथ से प्रसाद ले लेते हैं, लेकिन धार्मिक नजरिए से इसे गलत माना जाता है। प्रसाद लेने से पहले हाथों को अच्छे से साफ करना बेहद जरूरी है। इसके बाद प्रसाद पाते समय दोनों हाथ आगे बढ़ाना चाहिए। प्रसाद ग्रहण करते समय जल्दबाजी दिखाना भी सही नहीं माना जाता है। इसलिए प्रसाद को धीरे-धीरे खाना चाहिए।

यह भी पढ़ें- क्या आप भी चरणामृत और पंचामृत को समझते हैं एक? आज ही जान लें ये अंतर

यह भी पढ़ें- बाएं हाथ से कभी नहीं करने चाहिए ये 3 काम, माना जाता है अशुभ

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।