विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

श्रीकृष्ण के रणछोड़ बनने की रोचक कथा, जब हार नहीं बल्कि जीत के लिए पीछे हटे थे कान्हा

Published: Thu, 22 Jan 2026 02:30 PM (IST)

भगवान श्रीकृष्ण को रणछोड़ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने कालयवन से युद्ध करने की बजाय रणभूमि छोड़ दी थी। ...और पढ़ें

Lord Krishna: श्रीकृष्ण के रणछोड़ नाम की महिमा। (Ai Generated Image)

Lord Krishna: श्रीकृष्ण के रणछोड़ नाम की महिमा। (Ai Generated Image)

HighLights

  1.  भगवान श्रीकृष्ण के अनगिनत नाम हैं 

  2.  उनके हर नाम के पीछे एक अद्भुत लीला छिपी है

  3. इन्हीं नामों में से एक नाम रणछोड़ है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण के अनगिनत नाम हैं और उनके हर नाम के पीछे एक अद्भुत लीला छिपी है। इन्हीं नामों में से एक नाम है रणछोड़। आमतौर पर किसी भी योद्धा के लिए युद्ध का मैदान छोड़ना कायरता माना जाता है, लेकिन जगत के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण के लिए यह उनकी श्रेष्ठ रणनीति में से एक साबित हुआ। आइए पढ़ते हैं वह रोचक कथा, जिसके कारण श्रीकृष्ण (Lord Krishna) का नाम रणछोड़ पड़ा।

Why Krishna Called Ranchhod 1

Ai Generated Image

शिव का वरदान

यह कथा (Krishna Battlefield Story) द्वापर युग की है, जब मगध नरेश जरासंध ने मथुरा पर सत्रह बार आक्रमण किया और हर बार श्रीकृष्ण ने उसे पराजित किया। अठारहवीं बार जरासंध ने कालयवन नाम के एक शक्तिशाली यवन राजा को अपने साथ मिला लिया। कालयवन को भगवान शिव से यह वरदान प्राप्त था कि उसे कोई भी योद्धा या अस्त्र-शस्त्र नहीं मार सकेगा। कालयवन अपनी विशाल सेना के साथ मथुरा की सीमा पर आ खड़ा हुआ। श्रीकृष्ण जानते थे कि अगर कालयवन से युद्ध हुआ, तो मथुरा की निर्दोष जनता का भारी नुकसान होगा और वरदान की वजह से उसे शस्त्रों से मारना मुश्किल है।

जब रणभूमि से भागे श्रीकृष्ण

जब कालयवन श्रीकृष्ण को ललकारने लगा, तो प्रभु बिना किसी शस्त्र के रणभूमि से भागने लगे। कालयवन उन्हें कायर समझते हुए उनके पीछे भागने लगा। श्रीकृष्ण उसे बहुत दूर एक अंधेरी गुफा तक ले गए। उस गुफा में त्रेतायुग के राजा मुचकुंद सो रहे थे। असुरों के खिलाफ देवताओं की सहायता करने के बाद, देव राज इंद्र ने मुचकुंद को वरदान दिया था कि जो भी उनकी नींद में बाधा डालेगा, वह उनकी पहली दृष्टि पड़ते ही भस्म हो जाएगा।

रणछोड़ नाम कैसे पड़ा? (Why Krishna Called Ranchhod?)

श्रीकृष्ण ने चतुराई से अपना पीतांबर सोए हुए राजा मुचकुंद पर डाल दिया और खुद अंधेरे में छिप गए। कालयवन ने मुचकुंद को कृष्ण समझकर जोर से लात मारी। जैसे ही मुचकुंद की नींद खुली और उनकी दृष्टि कालयवन पर पड़ी, वह तुरंत जलकर राख हो गया। इस तरह बिना रक्त बहाए श्रीकृष्ण ने अपने शत्रु का अंत कर दिया।

वे युद्ध का मैदान छोड़कर भागे थे, इसलिए जरासंध और कालयवन की सेना ने उनका उपहास उड़ाते हुए उन्हें 'रणछोड़' कहना शुरू किया। बाद में कान्हा के भक्तों ने भी इस नाम को बड़े प्रेम से अपनाया, क्योंकि यह नाम (Krishna Ranchhod Meaning) भगवान कृष्ण की बुद्धिमानी का प्रतीक है।

यह भी पढ़ें- Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी के दिन करें इन मंत्रों का जप, जीवन में बनी रहेगी सुख-शांति  

यह भी पढ़ें- Jaya Ekadashi पर इस तरह करें तुलसी की पूजा, मिलेगी भगवान विष्णु की असीम कृपा

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।