क्यों ‘नवसाचा गणपति’ कहलाते हैं लालबागचा राजा? नाम के पीछे छिपी है मन्नत से जुड़ी कहानी
मुंबई के लालबागचा राजा की एक झलक के लिए भक्त मीलों की दूरी तय करते हैं। आइए आपको बताते हैं इनके एक अनोखे नाम 'नवसाचा गणपति' की पूरी कहानी।

लालबागचा राजा: मन्नत पूरी करने की कहानी (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
लालबागचा राजा को 'नवसाचा गणपति' कहने का रहस्य।
1932 में व्यापारियों की मन्नत पूरी होने की कहानी।
भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाले गणपति के रूप में प्रसिद्ध।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देश में गणेश उत्सव की धूम हो और लालबागचा राजा के पंडाल की बात न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। यूं कहा जाए कि महाराष्ट्र में इस पर्व की रौनक ही लालबाग के राज माने जाते हैं। सबसे बड़े गणपति पंडाल में से एक और श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केंद्र माने जाने वाले यहां के गणपति की प्रतिमा हर साल एक नए रूप में अवतरित होती है।
मुंबई के लालबागचा राजा को मन्नतों का गणपति भी कहा जाता है और ऐसा कहा जाता है कि इस स्थान पर भक्त जो भी मनोकामना लेकर आते हैं, वो कुछ ही समय में पूरी हो जाती है। इसी वजह से लोग घंटों तक भीड़ में खड़े होकर भी दर्शन का इंतजार करते हैं। इस गणपति पंडाल में बप्पा की मूर्ति की एक झलक पाने के लिए लोग मीलों दूर से आते हैं।
लालबागचा राजा को ‘नवसाचा गणपति’ भी कहा जाता है और इसके पीछे एक अनोखा रहस्य छिपा है। आइए आपको बताते हैं इसके मतलब और इन्हें 'नवसाचा गणपति के नाम से पुकारे जाने की मान्यता क्या है?
लालबागचा राजा को क्यों माना जाता है मन्नतें पूरी करने वाला?
मुंबई के इस पंडाल के गणपति को मन्नत पूरी करने वाला माना जाता है। इसके पीछे एक कहानी है जो सालों पहले से चली आ रही है। एक बार साल 1932 में अंग्रेजों ने लालबाग के पेरूचल के बाजार को बंद कर दिया। वहां के मछुआरे और व्यापारी सभी बेरोजगार हो गए। तब उन्होंने गणपति बप्पा से अपना रोजगार वापस पाने की मन्नत मांगी।
मछुआरों ने मन्नत में कहा कि अगर हमें अपना रोजगार वापस मिल गया तो हर साल आपकी स्थापना करेंगे। बप्पा ने उनकी यह मुराद सुन ली और उन्हें 2 सालबाद ही एक नया बाजार मिल गया। इस मन्नत के पूरा होने पर मछुआरों ने 12 सितंबर 1934 को पहली बार सिर्फ 2 फुट की गणपति मूर्ति स्थापित की। उसी समय से मान्यता है कि जो भी इस गणपति पंडाल में जाता है और कोई भी इच्छा रखता है, वो पूरी जरूर होती है।
लालबागचा राजा क्यों कहलाए ‘नवसाचा गणपति’?
'नवसाचा गणपति' मराठी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है 'मन्नत या मनोकामना पूरी करने वाले गणपति' इसमें नवस का अर्थ मन्नत से होता है यानी कि एक ऐसी प्रार्थना जो किसी इच्छा पूर्ति के लिए ईश्वर से की जाती है, वहीं गणपति भगवान गणेश का ही एक नाम है।
इसका पूर्ण मतलब है कि गणपति का एक ऐसा रूप जहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। लालबागचा राजा के गणपति को 'नवसाला पावणारा गणपति' भी कहा जाता है और यह भी एक मराठी वाक्य है जिसका अर्थ भी मन्नत पूरी करने वाला होता है।
पंडाल में भक्तों की लंबी कतार लगती है
लालबागचा राजा के गणपति पंडाल में हर साल दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगभग 5 किलोमीटर की दूरी तक लगती है और इसमें मनोकामना पूरी करने के लिए लोग 20 घंटे से भी ज्यादा समय इंतजार करते हैं। हर साल बप्पा की प्रतिमा का स्वरूप बदलता जा रहा है और जहां पहली बार गणपति की 2 फिट की मूर्ति स्थापित हुई थी, वहीं अब 20 फिट ऊंची गणपति प्रतिमा स्थापित होती है।
अगर आप भी मुंबई के लाल बाग के राजा के दर्शन करेंगे, तो ये किसी भी समस्या से बाहर निकालने में मदद करते हैं।
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