विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गणेश उत्सव 2026: बड़े गणपति के साथ पंडाल में क्यों रखी जाती है बप्पा की छोटी मूर्ति? 

Published: Tue, 15 Sep 2026 03:00 PM (IST)

गणपति उत्सव के दौरान बड़ी मूर्ति के साथ एक छोटी प्रतिमा रखने की परंपरा है। छोटी मूर्ति यह दर्शाती है ...और पढ़ें

गणपति की बड़ी मूर्ति के साथ छोटी प्रतिमा का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

गणपति की बड़ी मूर्ति के साथ छोटी प्रतिमा का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. छोटी मूर्ति बप्पा के स्थायी निवास का प्रतीक है।

  2. बड़ी मूर्ति का विसर्जन, छोटी घर में ही रहती है।

  3. भक्तों को विदाई पर भावुक होने से बचाती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आजकल देश में गणपति उत्सव की धूम है और लोग बप्पा की कृपा पाने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लीन हैं। वास्तव में पूरे 10 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव का आनंद ही कुछ अलग होता है।

जगह-जगह पर गणपति पंडाल सजाए जाते हैं और लोग अपने घरों में भी गणपति की स्थापना करते हैं। यही नहीं इन दिनों नियमित रूप से गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना पूरे नियम से करते हैं। सुबह और शाम पंडालों में आरती के साथ प्रसाद वितरण होता है और भक्त गणपति की भक्ति में झूमते नजर आते हैं।

चाहे घर हो या फिर पंडाल, लोग हमेशा बप्पा की बड़ी और खूबसूरत मूर्ति की स्थापना गणपति पंडाल में करते हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि बड़ी मूर्ति के साथ एक छोटी मूर्ति भी पंडाल में रखी जाती है। आइए आपको बताते हैं इसके कारण क्या होते हैं।

गणपति की बड़ी मूर्ति के साथ छोटी प्रतिमा क्यों रखी जाती है?

हम अपने घर या पंडाल के लिए हमेशा बड़ी मूर्ति लाते हैं जिससे उनके पूजन से घर में खुशहाली आए। वहीं उस बड़ी मूर्ति के साथ बप्पा की एक छोटी मूर्ति भी रखी जाती है, इसके पीछे एक गहरी आस्था और विश्वास छिपा रहता है।

यह सिर्फ एक परंपरा नहीं है बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि गणपति बप्पा हमेशा हमारे साथ ही रहेंगे और उनका आशीर्वाद घर परिवार पर सदैव बना रहेगा। इस परंपरा के पीछे एक कारण है कि जब गणपति पूजन किया जाता है तब बड़े और छोटे गणपति को भक्ति से पूजा जाता है और विसर्जन के समय सिर्फ बड़ी मूर्ति को ही विसर्जित किया जाता है।

गणपति की छोटी प्रतिमा का नहीं होता है विसर्जन

ज्योतिष और शास्त्रों की मानें तो पंडाल में स्थापित बड़े गणपति का विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है, जबकि छोटी प्रतिमा को मंदिर या घर में ही रखा जाता है। छोटी प्रतिमा इस बात का संकेत देती है कि बप्पा सिर्फ कुछ दिनों के मेहमान नहीं हैं, बल्कि अब हमेशा घर में एक सदस्य के रूप में विराजमान रहेंगे।

गणपति हमारे सभी कष्टों को दूर करेंगे और शुभ फल देंगे। इस विश्वास और भक्ति के साथ छोटी मूर्ति की स्थापना की जाती है कि कभी भी गणपति हमारे घर से विदा नहीं लेंगे। छोटी प्रतिमा की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि आती है और जीवन में सौभाग्य बढ़ता है।

भक्तों को भावुक होने से बचाती है

अक्सर देखा जाता है कि जब भी पंडाल ये बप्पा की विदाई होती है, तो लोग भावुक हो जाते हैं और उनकी आंखों से अश्रु धारा बहने लगती है।

ऐसे में छोटी मूर्ति भक्तों को भावुक होने से रोकती है, क्योंकि छोटे गणपति को देखकर लोगों के मन में यह विश्वास हो जाता है कि गणपति बप्पा उनके आस-पास ही मौजूद हैं और उनकी विदाई नहीं हो रही है। वहीं मन में यह विश्वास भी होता है कि अगले साल बप्पा का एक नए रूप में फिर से आगमन होगा।

बड़ी गणेश प्रतिमा का विसर्जन एक विधि है जिसमें प्रकृति और पंच तत्वों में बप्पा को समर्पित किया जाता है। वहीं छोटी मूर्ति यह संदेश देती है कि बप्पा का आशीर्वाद हमेशा आपके जीवन में बना रहेगा। इसी वजह से हर साल गणपति स्थापना में दोनों प्रतिमाएं एक साथ रखी जाती हैं।

यह भी पढ़ें- गणेश चतुर्थी 2026: इन 10 दिनों में करें भगवान गणपति का यह पाठ, बप्पा की कृपा से चमक जाएगी किस्मत

यह भी पढ़ें- भगवान गणेश के 32 मंगलकारी स्वरूपों में से घर में किसकी पूजा करने से मिलता है अपार धन?

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।