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इस एक वजह से रामायण काल में लक्ष्मण जी की पत्नी उर्मिला नहीं गई थीं वनवास, जानें यहां

Published: Sat, 27 Jun 2026 05:00 PM (IST)

रामायण में लक्ष्मण जी की पत्नी उर्मिला उनके साथ वनवास नहीं गईं क्योंकि लक्ष्मण जी ने उनसे अयोध्या में रहकर ...और पढ़ें

रामायण में उर्मिला का महान त्याग: जानें क्यों नहीं गईं लक्ष्मण के साथ वनवास (Picture Credit: AI Generated)

रामायण में उर्मिला का महान त्याग: जानें क्यों नहीं गईं लक्ष्मण के साथ वनवास (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण की कई ऐसी कथाएं हैं जिनके बारे में लोग जानना चाहते हैं। ऐसे ही प्रभु श्री राम के भाई लक्ष्मण और उनकी पत्नी के त्याग की कथा है जिसकी गहराई हम सभी जानना चाहते हैं।

यह एक प्रश्न है कि आखिर क्यों लक्ष्मण जी की पत्नी उनके साथ वनवास के लिए नहीं गईं थी? उर्मिला राजा जनक की छोटी पुत्री थीं और माता सीता की छोटी बहन थीं जिनका विवाह श्री राम जी के भाई लक्ष्मण जी के साथ हुआ।

जब प्रभु श्री राम और सीता के साथ लक्ष्मण जी ने भी वन जाने का निर्णय लिया तब उनकी पत्नी उर्मिला ने भी वन जाने की इच्छा जताई। उस समय लक्ष्मण जी ने देवी उर्मिला से अयोध्या में रुककर माता-पिता की सेवा करने का आग्रह किया। आइए आपको बताते हैं उन कारणों के बारे में जिसकी वजह से उर्मिला वन में नहीं गईं।

लक्ष्मण जी की पत्नी सेवा भाव में नहीं गईं वन

रामायण ग्रंथ में इस बात का जिक्र किया गया है कि जिस समय केकई ने श्री राम के लिए 14 वर्षों का वनवास मांगा और वो अपनी पत्नी माता सीता के साथ वन जाने के लिए तैयार थे, उसी समय लक्ष्मण जी ने भी वन जाने का निर्णय लिया। लक्ष्मण जी ने राम जी से आग्रह किया कि वो उन्हें भी साथ वन ले जाएं। इस आग्रह के पीछे कारण था कि वो भाई और भाभी की सेवा करना चाहते थे।

लक्ष्मण जी वन इसलिए जाना चाहते थे कि हर समय वह उनकी देखरेख और वन में जीवन जीने में उनकी सहायता कर सकें। इस बात के लिए जब लक्ष्मण जी अपनी पत्नी उर्मिला जी से मिलने गए तब उर्मिला ने भी उन्हें धर्म से जुड़े इस कार्य को करने से नहीं रोका और स्वयं भी वन चलने की इच्छा दिखाई। उस समय लक्ष्मण जी ने उर्मिला से अयोध्या में रुकने के लिए कहा और यह भी कहा कि उन्हें महल में माता-पिता की सेवा करनी चाहिए। इस सेवा भाव की वजह से उर्मिला वन में लक्ष्मण जी के साथ नहीं गईं।

उर्मिला ने चौदह साल तक किया बड़ा त्याग

मैथली शरण गुप्त ने साकेत में उर्मिला के महान चरित्र का वर्णन किया है और उनके त्याग की कहानी बताई है। हालांकि, रामायण में उर्मिला की बहुत छोटी सी भूमिका दिखाई गई है और लक्ष्मण जी का उनके साथ संवाद दिखाया गया है जिसमें यह है कि कैसे उन्होंने महल में रहकर माता-पिता की सेवा को ही प्राथमिकता दी।

वास्तव में यह एक स्त्री का एक बहुत बड़ा त्याग था जो वह 14 वर्ष तक अपने पति वियोग में महल में समय व्यतीत कर रही थी। साकेत में उर्मिला के चरित्र को त्याग की मूर्ति बताया गया है।

मैथली शरण गुप्त की साकेत में उर्मिला के त्याग को दिखाते हुए ये पंक्तियां लिखी हैं-

कहा उर्मिला ने हे मन! तू प्रिय पथ का विघ्न न बन।
स्वार्थ त्याग कर तू भी अब, कर ले धर्म-पथ पर गमन।
लक्ष्मण का है धर्म यही, सेवा श्रीराम-सीता की करनी।
मैं बाधा बनूं न उनकी, यही उर्मिला ने ठानी।

वास्तव में उर्मिला का त्याग लक्ष्मण से कम नहीं था जिन्होंने 14 वर्षों के लिए अपनी समस्त इच्छाओं का त्याग भी किया।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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