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अंतिम संस्कार के बाद घर में क्यों लगाई जाती है तुलसी? पढ़ें इसके पीछे का गहरा आध्यात्मिक कारण

Published: Mon, 13 Jul 2026 11:33 AM (IST)

हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के बाद घर में तुलसी का पौधा लगाना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। गरुड़ पुराण के ...और पढ़ें

अंतिम संस्कार के बाद घर में तुलसी लगाने के कारण (Picture Credit- AI)

अंतिम संस्कार के बाद घर में तुलसी लगाने के कारण (Picture Credit- AI)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का स्वरूप कहा जाता है। इसलिए इसका इस्तेमाल शुभ कार्य और मृत्यु के समय किया जाता है। इसको जिस भी मृत व्यक्ति के मुख में डाला जाता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्यक्ति की मृत्यु के बाद एक परंपरा और निभाई जाती है, घर में तुलसी का पौधा लगाने की। गरुड़ पुराण में भी मृत्यु के पश्चात किए जाने वाले इस कार्य का महत्व बताया गया है। आइए इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं, ताकि आप भी इसे अच्छे से समझ सकें।

अंतिम संस्कार के बाद क्यों लगाते हैं घर में तुलसी का पौधा?

हिंदू धर्म में आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए तुलसी का पौधा महत्वपूर्ण माना गया है। इसी वजह से जब व्यक्ति अंतिम संस्कार करके श्मशान से घर लौटता है तो स्नान करने के बाद घर में तुलसी का पौधा जरूर लगाता है। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में शोक का प्रभाव भी कम होता है। साथ ही घर में शांति बनी रहती है, किसी तरह की परेशानी का वास नहीं होता है।

मोक्ष की प्राप्ति के लिए लगाई तुलसी जाती है

गरुड़ पुराण के नौवें अध्याय में कहा गया है कि, अंतिम संस्कार के समय तुलसी की लकड़ी का प्रयोग इसलिए किया जाता है, ताकि व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त हो सके। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु होती है, तो घर में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी पूजा करने से उस व्यक्ति की आत्मा को शांति प्राप्त होती है। संस्कार के बाद इसे वही व्यक्ति लगाता है, जो संस्कार करके आया होता है।

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गरुड़ पुराण के अनुसार, तुलसी का पौधा घर में लगे होने से यमदूत भी उस घर में प्रवेश नहीं करते हैं। साथ ही जो अशुभ समय चल रहा होता है, वह भी आपको परेशान नहीं करता है। इसलिए अंतिम संस्कार के बाद इसे लगाना अच्छा माना जाता है। साथ ही इसे जल देने से मन में भी शांति बनी रहती है। मन में विचलित करने वाले विचार नहीं आते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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