राधा अष्टमी के दिन दोपहर में ही क्यों की जाती है किशोरी जी की पूजा? जानिए इसका असली कारण
राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2026) पर किशोरी जी की पूजा दोपहर में करने का विशेष महत्व है, क्योंकि उनका प्राकट्य ...और पढ़ें

कब है राधा अष्टमी (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2026) का पर्व हर साल बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस शुभ अवसर पर किशोरी जी की साधना करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और लाड़ली जी की कृपा से खूब तरक्की होती है।
इस दिन दोपहर के समय राधा रानी की पूजा करना शुभ माना जाता है। अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर किशोरी जी की पूजा मध्याह्न काल (दोपहर) में ही क्यों होती है? अगर नहीं पता, तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं।
दोपहर में क्यों होती है पूजा?
शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था और जन्माष्टमी की विशेष पूजा आधी रात को होती है, उसी प्रकार राधा रानी का प्राकट्य भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दोपहर के समय हुआ था। इसलिए राधा अष्टमी के दिन राधा रानी की पूजा दोपहर में करना अधिक फलदायी माना जाता है।
कब है राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2026 Date and Time)
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत- 18 सितंबर दोपहर 01 बजकर 02 मिनट पर
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का समापन- 19 सितंबर दोपहर 03 बजकर 28 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार,राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त- 19 सितंबर को सुबह 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक है। इस दौरान आप किसी भी समय राधा रानी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
राधा अष्टमी के उपाय
- राधा अष्टमी के दिन विशेष चीजों का दान करने का बहुत महत्व है। इस दिन पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर में या जरूरतमंद लोगों को धन, वस्त्र और अन्न का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा अष्टमी के दिन सच्चे मन से इस उपाय को करने से जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहती और धन लाभ के योग बनते हैं।
- इसके अलावा राधा अष्टमी के दिन राधा-कृष्ण जी के युगल स्वरूप की पूजा-अर्चना जरूर करें। उन्हें फल अर्पित करें और दीपक जलाकर आरती करें। इस उपाय को करने से किशोरी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।
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