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इस एक वजह से महाभारत काल में गांधारी ने आंखों में बांधी थी पट्टी, आप भी जानें

Published: Wed, 01 Jul 2026 11:16 AM (IST)

गांधारी ने अपने पति धृतराष्ट्र के जन्मांध होने के कारण आजीवन अपनी आंखों पर पट्टी बांधने का प्रण लिया था। ...और पढ़ें

महाभारत की गांधारी ने क्यों बांधी थी आंखों पर पट्टी जानें इसका रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

महाभारत की गांधारी ने क्यों बांधी थी आंखों पर पट्टी जानें इसका रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण, महाभारत में कई ऐसे पात्र हैं जिनके बारे में जानने की इच्छा सभी रखते हैं। अगर हम महाभारत की बात करें तो कई पात्रों का चरित्र अत्यंत अनोखा था।

उनमें से ही एक गांधारी थीं जिनके बारे में यह बताया जाता है कि वो हमेशा अपनी आंखों में पट्टी बांधकर रखती थीं। कई बार मन में ये सवाल आता है कि आंखों की रोशनी होने के बाद भी ऐसा क्यों था?

महाभारत में ही एक बात का वर्णन मिलता है कि जब गांधारी ने धृतराष्ट्र से विवाह करने का निर्णय लिया और विवाह के बाद उन्हें पता चला कि उनके पति धृतराष्ट्र जन्म से ही अंधे हैं, तब उन्होंने स्वयं भी अपनी आखों को हमेशा के लिए बंद रखने का प्राण किया। आइए आपको बताते हैं गांधारी के आंखों में पट्टी बांधकर रखने के कारणों के बारे में।

गांधारी ने आंखों में पट्टी क्यों बांधी थी?

गांधार नरेश की पुत्री गांधारी अत्यंत सुंदर, विदुषी और परम शिव भक्त थी। भीष्मपितामह ने धृतराष्ट्र के लिए उनका हाथ मांगा और उस समय गांधार नरेश हस्तिनापुर की सैन्य शक्ति के आगे विवश थे और उन्हें गांधारी का विवाह धीतराष्ट्र से करना ही उचित लगा।

जब गांधारी को इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने स्वयं भी धृतराष्ट्र से विवाह करने का निर्णय लिया। उन्हें जब पता चला कि उनके पति जन्मांध यानी जन्म से ही अंधे हैं तो गांधारी ने इस बात का विद्रोह करने के बजाय इसे ही अपना भाग्य मान लिया और स्वयं भी अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर संसार को न देखने का निर्णय लिया।

उस समय गांधारी का एक ही वचन था जो संसार मेरे स्वामी नहीं देख सकते उसे देखने का अधिकार मुझे भी नहीं है। वास्तव में ये उनके पतिव्रता होने का सबसे बड़ा उदाहरण था। इस एक कारण की ही वजह से गांधारी भी आजीवन आंखों में पट्टी बांधकर रहीं और संसार को नहीं देख पाईं।

गांधारी को मिला था एक विशेष वरदान

गांधारी धृतराष्ट्र से विवाह करने के बाद 100 पुत्रों की माता बनी जिसमें सबसे बड़ा दुर्योधन था। गांधारी की पट्टी महाभारत में कई बड़ी घटनाओं के दौरान नहीं खुली और शिव आराधना से उन्हें एक वरदान भी मिला कि जब भी ये पट्टी खुलेगी और वो जिसको भी अपनी आंखों से देख लेंगी उसका शरीर वज्र के समान मजबूत हो जाएगा।

इसी वजह से जब गांधारी का पुत्र दुर्योधन महाभारत युद्ध के लिए जा रहा था, उस समय गांधारी ने उसे यह आदेश दिया कि वो उनके सामने निर्वस्त्र आए जिससे उनकी दृष्टि से दुर्योधन का शरीर अभेद्य हो जाए और उसे कोई भी पराजित न कर सके।

उस समय गांधारी ने दुर्योधन को अपनी दृष्टि से देखा, लेकिन माता से लज्जावश वो निर्वस्त्र सामने न आ सका। जिसकी वजह से दुर्योधन का आधा शरीर ही अभेद्य हो पाया।

इस प्रकार पति मोह में आसक्त होकर ही आंखों में हमेशा के लिए पट्टी बांध ली थी। वास्तव में यह पतिव्रता होने के एक बड़ा उदाहरण ही था।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।