विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हवन में घी की ही आहुति क्‍यों दी जाती है? पढ़ें इसका महत्‍व, लाभ, नियम और रहस्य

Published: Tue, 04 Aug 2026 05:30 PM (IST)

हवन में घी की आहुति का धार्मिक महत्व, लाभ, सही नियम और 'स्वाहा' के साथ आहुति देने का रहस्य पढ़ें।

यज्ञ में घी की आहुति पूजा के वातावरण को ऊर्जावान बनाती है। (Picture Credit- AI Generated)

यज्ञ में घी की आहुति पूजा के वातावरण को ऊर्जावान बनाती है। (Picture Credit- AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में किसी विशेष पर्व या धार्मिक अनुष्‍ठानों में यज्ञ या हवन करने की परंपरा है। यज्ञ या हवन में घी की आहुति दी जाती है। क्‍या आपके मन में भी इसे लेकर कभी सवाल उठता है कि आखिर हवन या यज्ञ में घी की ही आहुति क्‍यों दी जाती है?

इसका उत्‍तर आपको यजुर्वेद में मिल जाएगा, वेद में कई आहुति मंत्र और उनके महत्‍व के बारे में बताया गया है। वेद के अध्‍याय 5 के मंत्र 28, 38 और अध्‍याय 17 के मंत्र 90, 93 में आहुति के समय घी के प्रयोग पर विस्‍तार से बताया गया है। आहुति के समय श्रद्धा और विश्वास के साथ घी अग्नि में अर्पित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह प्रक्रिया मन, माहौल और जीवन में सकारात्मकता लाने का माध्यम बनती है। वहीं वेद के अनुसार आहुतियों में घी डालने से आकाश और पृथ्‍वी को पुष्‍ट किया जाता है। घी पूजा के माहौल को ऊर्जावान बनाने का भी साधन माना गया है। चलिए आहुति में घी डालने के महत्‍व और लाभ को और विस्‍तार से समझते हैं।

घी की आहुति क्यों दी जाती है?

शुद्ध और सात्त्विक घी को पवित्र माना जाता है। इसलिए यज्ञ में घी अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे देवता प्रसन्‍न हो जाते हैं। इतना ही नहीं, घी की आहुति हमारी श्रद्धा, भक्ति और समर्पण की भावना को भी व्यक्त करती है। जब घी अग्नि में डाला जाता है, तो यह अग्नि के साथ मिलकर ऊर्जा उत्पन्न करता है। आहुति देते समय "स्वाहा" का उच्चारण किया जाता है, जिससे यह भाव प्रकट होता है कि हम अपने अहंकार, इच्छाओं और नकारात्मक विचारों का त्याग कर रहे हैं। इस प्रकार आहुति केवल घी अर्पित करना नहीं, बल्कि एक तरह से आत्मसमर्पण करने का प्रतीक भी माना गया है।

घी की आहुति का रहस्य

मान्यता है कि घी की आहुति यज्ञ को अधिक प्रभावशाली और सफल बनाती है। जब घी अग्नि में पड़ता है, तो इसके कण सूक्ष्म रूप में वातावरण में फैल जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस प्रक्रिया से वायु शुद्ध होती है और व्‍यक्ति के आस-पास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भी माना जाता है कि यज्ञ के धुएं से हानिकारक तत्व और कीटाणु कम हो सकते हैं।

घी की आहुति के मुख्य लाभ

  • ऐसी मान्यता है कि यज्ञ में घी की आहुति से देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
  • इससे मन, वचन और कर्म की शुद्धि का भाव विकसित होता है।
  • घर और आसपास के वातावरण में शांति और पवित्रता का अनुभव होता है।
  • स्वस्थ जीवन की कामना के साथ यदि यज्ञ किया जाए और घी की आहुति डाली जाए, तो परिवार के सदस्‍यों में रोग और दोष कम होते हैं।
  • इसके साथ ही घी की आहुति से कार्यों में सफलता, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

आहुति देते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • यज्ञ में हमेशा शुद्ध, सात्त्विक और अच्छी गुणवत्ता वाले घी का उपयोग करना चाहिए।
  • आहुति देते समय मन में श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक भाव रखना आवश्यक है।
  • बिना श्रद्धा के केवल औपचारिक रूप से आहुति देने से फल की प्राप्ति नहीं होती है।
  • सच्चे मन से किया गया यज्ञ अधिक फलदायी माना जाता है।
  • प्रत्येक आहुति के साथ "स्वाहा" का उच्चारण करना भी परंपरा का महत्वपूर्ण भाग है।

अत: यज्ञ या हवन में घी की प्रत्येक आहुति केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और लोककल्याण की भावना का प्रतीक मानी जाती है।

यह भी पढ़ें- हवन में आखिर क्यों होता है सिर्फ आम की लकड़ी का इस्तेमाल?

यह भी पढ़ें- नवग्रह शांति के लिए केवल आम नहीं, ये लकड़ियां भी इस्तेमाल होती हैं, चुनें हवन की सही लकड़ी?

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।