विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भूलकर भी ये लोग न पहनें 'नीलंगी' कपड़े, स्कंद पुराण और मनुस्मृति में दी गई है सख्त चेतावनी

Published: Sun, 14 Jun 2026 08:00 PM (IST)

ब्राह्मणों को नीले वस्त्र न पहनने के पीछे धार्मिक और शास्त्रीय कारण हैं, इसके पीछे धार्मिक मत क्या है आइए जानते हैं?

नील लगा कपड़ा किसे नहीं पहनना चाहिए? (AI-Generated Image)

नील लगा कपड़ा किसे नहीं पहनना चाहिए? (AI-Generated Image)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म और प्राचीन संस्कृति में कपड़ों के रंग, स्वच्छता और उनके मानसिक व आध्यात्मिक प्रभाव पर काफी ध्यान रखा गया है। खासतौर से ब्राह्मण वर्ण से जुड़े लोगों के लिए, जो सात्विकता का प्रतीक माने जाते हैं।

शास्त्रों में कपड़ों को लेकर काफी कड़े नियम बताए गए हैं। माना जाता है कि, ब्राह्माणों को नीलंगी कपड़े (नील से रगं कपडे़) नहीं पहनने चाहिए। आइए धार्मिक और शास्त्रीय संदर्भ से इसके पीछे का रहस्य जानते हैं?

नीलंगी कपड़ों को लेकर शास्त्रीय श्लोक क्या कहता है?

"नीलीरक्तं यदा वस्त्रं ब्राह्मणस्तु धरते।
अहोरात्रं तु भूत्वा पूतः पञ्चगव्येन शुद्ध्यति॥"

मतलब- यदि कोई ब्राह्मण जानें-अनजानें नील से रंग हुए कपड़े पहन लेता है, तो वह अशुद्ध हो जाता है। ऐसे में उस दोष की भरपाई करने के लिए उसे एक दिन और एक रात का पूर्ण व्रत रखना पड़ता है और तत्पश्चात पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पवित्र मिश्रण) का सेवन करके ही दुबारा से शुद्ध हो पाता है।

ब्राह्मणों के लिए नीले रंग के वस्त्र निषेध

नील लगा कपड़ा किसे नहीं पहनना चाहिए? (AI-Generated Image)

नीले वस्त्रों के निषेध का कारण क्या है?

प्राचीन शास्त्रों (स्कंद पुराण) में नील के पौधे से रंग तैयार करने की प्रक्रिया को अत्यंत अशुद्ध माना जाता है, क्योंकि नील बनाने के लिए पत्तों को सड़ाकर उसका रंग निकाला जाता था।

इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र में नीला रंग शनि और राहु जैसे तामसिक और क्रूर ग्रहों से संबंध रखता है। इस वजह से पूजा, जप-तप और सात्विक कार्यों में इस रंग का इस्तेमाल पूरी तरह से निषेध है। इसके अलावा कुछ परंपराओं में माना जाता है कि, नीले वस्त्रों का संबंध चाण्डाल से होता है।

प्रमुख धर्म ग्रंथों में इसे लेकर क्या नियम?

मनुस्मृति और पाराशर स्मृति इन ग्रंथों में साफ लिखा है कि, नील से रंगे कपड़ों को पहनकर किया गया दान, पूजा, जप, तप पूर्ण नहीं होता है।

पद्म पुराण ग्रंथ के अनुसार, नील को छूने मात्र से भी पूजा-पाठ निष्फल हो जाती है। यहां तक कि नीले रंग के कपड़े पहनकर भोजन पकाने से या खाने से दोष लगता है।

कूर्म पुराण के मुताबिक, इसमें भी ब्राह्मणों के लिए सफेद और पीले या नारंगी कपड़ों को सबसे उत्तम माना जाता है, जबकि नीले रंग के कपड़े को पहनने से बचना चाहिए।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।