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शिव जी को प्रणाम करने की सही मूद्रा क्या है? इन नियमों का पालन करने से मिलता है महादेव का आशीर्वाद

Published: Sat, 01 Aug 2026 10:17 AM (IST)

शिव जी को प्रणाम करने की सही विधि जानिए। पूजा में इन नियमों का पालन करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।

शिव निर्वाण मुद्रा में करें महादेव को प्रणाम । (Picture Credit- AI Generated)

शिव निर्वाण मुद्रा में करें महादेव को प्रणाम । (Picture Credit- AI Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है। वे थोड़ी सी भक्ति से भी प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन शास्त्रों में शिव जी को प्रणाम करने की एक विशेष विधि और मुद्रा बताई गई है। इसे अपनाने से पूजा का पूरा फल मिलता है और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसे शिव निर्वाण मुद्रा में शिव शंभु को प्रणाम करना कहते हैं। चलिए हम आपको महादेव को प्रणाम करने की इस विशेष विधि के बारे में विस्‍तार से बताते हैं।

शिव निर्वाण मुद्रा क्या है?

शिव जी को प्रणाम करने के लिए सबसे शुभ मुद्रा "शिव निर्वाण मुद्रा" मानी जाती है। निर्वाण का अर्थ है मोक्ष और शांति। इस मुद्रा में हाथों को करके प्रणाम करने पर मन शांत होता है और शिव जी से जुड़ाव गहरा होता है।

इस मुद्रा को आप घर पर शिवलिंग के सामने या मंदिर में दर्शन के समय कर सकते हैं। इसे करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन में सकारात्मकता ऊर्जा का संचार होता है।

निर्वाण मुद्रा बनाने की सही विधि

निर्वाण मुद्रा बनाना बहुत आसान है। बस कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

हाथों की स्थिति

सबसे पहले दोनों हाथों को सीधा रखें। अब बाएं हाथ को हल्का मोड़कर रखें। दाएं हाथ की उंगलियों को बाएं हाथ की उंगलियों के बीच में फंसा दें। ध्यान रहे कि केवल दोनों हाथों के अंगूठे और तर्जनी उंगली यानी इंडेक्स फिंगर सीधी ऊपर की तरफ रहें। बाकी उंगलियां आपस में जुड़ी हुई हों।

स्पर्श और ध्यान

मुद्रा बन जाने के बाद इसे सबसे पहले अपने हृदय पर लगाएं। फिर मुख के पास लाएं। इसके बाद इसे अपनी भृकुटी यानी दोनों भौंहों के बीच तृतीय नेत्र या आज्ञा चक्र पर स्पर्श कराएं। ऐसा करने से आपकी ऊर्जा शिव जी से जुड़ती है।

मानसिक जाप

मुद्रा बनाकर आंखें बंद कर लें। मन में महादेव के लिंग स्वरूप का ध्यान करें। साथ ही मन ही मन "ॐ नमः शिवाय" या सिर्फ "ॐ" का जप करें। 3 से 11 बार जप करने के बाद प्रणाम करें।

शिव जी को प्रणाम करते समय इन नियमों का रखें ध्यान

साफ-सफाई जरूरी है: शिव जी को प्रणाम करने से पहले स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। मन भी शुद्ध होना चाहिए।

शिवलिंग की परिक्रमा: शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा आधी ही की जाती है। इसे "सोमसूत्र" कहते हैं। पूरा गोल चक्कर न लगाएं।

जल चढ़ाने का नियम: शिवलिंग पर जल या दूध हमेशा धीरे-धीरे चढ़ाएं। चढ़ाते समय "ॐ नमः शिवाय" बोलते रहें।

पीठ न दिखाएं: प्रणाम करने के बाद शिवलिंग को पीठ दिखाकर न जाएं। थोड़ा पीछे हटकर फिर जाएं।

 बेलपत्र और धतूरा: अगर संभव हो तो शिव जी को बेलपत्र जरूर अर्पित करें। बेलपत्र उल्टा करके चढ़ाया जाता है।

इस मुद्रा से क्या लाभ मिलता है

  • शिव निर्वाण मुद्रा से मन को शांति मिलती है।
  • तनाव और चिंता दूर होती है।
  • यह मुद्रा ध्यान बढ़ाने में मदद करती है।
  • मान्यता है कि इस विधि से प्रणाम करने पर महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं।
  • घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मकता दूर होती है।

अत: शिव जी को प्रसन्न करने के लिए बड़े-बड़े उपाय करने की जरूरत नहीं है। बस सच्चे मन से सही मुद्रा और नियमों के साथ प्रणाम करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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