Ram Mandir Bhumi Pujan Timing: सरयू से सटी पावन धरा अयोध्या 5 अगस्त को एक अलग ही दिन देखने जा रही है। अभिजीत मुहूर्त में राम लला के मंदिर की पहली ईंट रखी जाएगी। 5 अगस्त को भूमि पूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त के 32 सेकेंड बेहद खास रहने वाले हैं। इसमें दोपहर के 12 बजकर 15 मिनट और 15 सेकंड के बाद ठीक 32 सेकंड के भीतर पहली ईंट रखी जाएगी। ज्योतिष के अनुसार किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ में अभिजीत मुहूर्त का समय बहुत ही शुभ और कल्याणकारी होता है। आइए समझते हैं कि यहा अभिजीत मुहूर्त क्या होता है।

ज्योतिष शास्त्र में अभिजीत मुहूर्त: 

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य और अनुष्ठान शुभ मुहूर्त देखकर ही प्रारंभ किया जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार एक दिन में सूर्योदय से लेकर सूर्योदय तक कुल 30 तरह के मुहूर्त होते हैं। अभिजीत मुहूर्त सभी 30 मुहूर्तों में अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। अभिजीत का मतलब होता है विजेता और मुहूर्त का अर्थ समय होता है। यानी अभिजीत मुहूर्त में किया गया कोई भी शुभ कार्य अवश्य सफल होता है। मान्यता है अगर किसी भी शुभ कार्य को शुभ मुहूर्त में किया जाए तो उसका परिणाम अवश्य ही सकारात्मक मिलता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त की गणना करते समय दिन, तिथि, नक्षत्र, योग और दिनमान की प्रमुखता दी जाती है। अभिजीत मुहूर्त हर दिन में एक ऐसा समय आता है जिसमें लगभग सभी शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।

वैसे तो सभी तरह के शुभ कार्यो के लिए अभिजीत मुहूर्त बहुत शुभ और मंगलकारी माने गए हैं। अभिजीत मुहूर्त में यात्रा करना, नये कार्य का शुभारंभ करना, व्यापार शुरू करने का और पूजा करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। परन्तु कुछ लोगों का मानना है कि मांगलिक कार्य और ग्रह प्रवेश जैसे प्रमुख कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त के साथ और भी योगों को देखना आवश्यक है।

वैभवकारी है अभिजित मुहूर्त: 

अभिजित मुहूर्त में भूमि पूजन होना वैभवकारी साबित होगा। इस मुहूर्त में जो भी कार्य शुरू किया जाता हैए उसमें सफलता अवश्य मिलती है। 15 मुहूर्तों में से अभिजित मुहूर्त आठवें नंबर पर आता है और बहुत ही फलदायी होता है। ज्योतिषशास्त्र में कहा गया है कि 28 वां नक्षत्र अभिजीत होता है जो सभी कार्यों के लिए शुभ है। अगर कोई शुभ मुहूर्त ना हो तो अभिजीत के समय बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य संपन्न किया जा सकता है। साथ ही 5 अगस्त को भाद्रपद महीने में सिंह राशि में सूर्य रहेंगे। जिससे यह मुहूर्त और भी फलदायी हो जाएगा।

धनिष्ठा नक्षत्र का भूमि से है संबंध: 

धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं जो भूमि के कारक ग्रह हैं। इस नक्षत्र में भूमि पूजन कार्यक्रम का आरंभ होगा। वसु इस नक्षत्र के देवता हैं जो विष्णु और इंद्र के रक्षक हैं। इसलिए यह समय को भूमि पूजन के लिए शुभ संयोग माना जा रहा है। 27 नक्षत्रों में से धनिष्ठा को 23वां नक्षत्र माना जाता है। कुछ ज्योतिष इस नक्षत्र का संबंध भगवान शिव और कृष्ण से भी संबंध मानते हैं।

अभिलाषाएं पूरी करता है यह नक्षत्र :

भूमि पूजन के कार्यक्रम का अंत शतभिषा नक्षत्र में होगा। इस नक्षत्र के बारे में ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि शतभिषा नक्षत्र ऐसा नक्षत्र है जो 100 अभिलाषाओं को पूर्ण करता है। शतभिषा नक्षत्र भूमि पूजन का समापन होना इसकी शुभता को दर्शाता है और मंदिर निर्माण के सफल होने की गवाही देता है।

 

Posted By: Shilpa Srivastava

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