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Vijaya Ekadashi 2026: लंका विजय के लिए श्री राम ने भी रखा था यह व्रत, जानें जीत दिलाने वाली यह अद्भुत कथा

Published: Sat, 07 Feb 2026 03:30 PM (IST)

विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2026 Katha) फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, जो हर काम ...और पढ़ें

Vijaya Ekadashi 2026 Katha: रामायण की विजय गाथा । (Ai Generated)

Vijaya Ekadashi 2026 Katha: रामायण की विजय गाथा । (Ai Generated)

HighLights

  1. विजया एकादशी बेहद पावन मानी जाती है

  2. विजया एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है

  3. इस दिन व्रत का विधान है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Vijaya Ekadashi 2026 Katha: विजया एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि विजय पाने का एक महामंत्र है। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही साफ है, यह व्रत हर काम में जीत दिलाता है। साल 2026 में यह व्रत 13 फरवरी, 2026 को रखा जाएगा। इस एकादशी व्रत का महत्व इसलिए भी बहुत अधिक है, क्योंकि स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने लंका पर विजय यानी जीत के लिए रखा था। आइए इसके महत्व को जानते हैं।

Vijaya Ekadashi 2026 katha 1

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जब समुद्र तट पर चिंता में थे प्रभु राम

जब भगवान राम माता सीता की खोज करते हुए वानर सेना के साथ समुद्र तट पर पहुंचे, तो उनके सामने एक चुनौती थी। एक ओर हिंसक जीवो से भरा समुद्र , और दूसरी ओर लंकापति रावण की मायावी और शक्तिशाली सेना। समुद्र को पार कैसे किया जाए और रावण जैसे महायोद्धा को कैसे हराया जाए? इस चिंता में प्रभु राम बहुत व्याकुल थे। तब लक्ष्मण जी के कहे अनुसार वे ऋषि वकदालभ्य के पास गए और उनसे मार्गदर्शन मांगा।

विजय का रहस्य

ऋषि वकदालभ्य ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा और प्रभु राम से कहा, "हे राम! फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहते हैं। अगर आप अपनी सेना के साथ विधि-विधान से इस व्रत का पालन करते हैं, तो न केवल आप समुद्र पार कर पाएंगे, बल्कि लंका पर आपकी विजय भी निश्चित होगी।"

व्रत का प्रभाव और लंका विजय

ऋषि के कहे अनुसार, भगवान राम ने विधि-विधान से कलश स्थापना की और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करते हुए विजया एकादशी का व्रत रखा। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से ही वानर सेना के लिए समुद्र पर राम सेतु बनाना संभव हो सका और श्रीराम ने रावण का वध किया। साथ ही धर्म की अधर्म पर जीत का ध्वज लहराया गया। तभी से यह माना जाता है कि जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा से यह व्रत करता है, उसे तीनों लोकों में कोई हरा नहीं सकता।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।