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वट सावित्री व्रत 2026: सुहागिनें बरगद पूजा में रखें इन बातों का खास ख्याल, एक छोटी सी गलती पड़ सकती है भारी

Published: Thu, 07 May 2026 12:01 PM (IST)

वट सावित्री व्रत पर बरगद की पूजा करते समय किन गलतियों से बचना चाहिए? आइए यहां जानते हैं।

Vat Savitri Vrat 2026: बरगद की पूजा के दौरान न करें ये गलतियां। Ai Generated Image

Vat Savitri Vrat 2026: बरगद की पूजा के दौरान न करें ये गलतियां। Ai Generated Image

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का स्थान बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह व्रत न केवल पति की लंबी आयु की कामना के लिए रखा जाता है, बल्कि यह देवी सावित्री के त्याग और संकल्प का प्रतीक भी है। ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पर्व पर बरगद के वृक्ष की पूजा की जाती है।

ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष में साक्षात त्रिदेव का वास होता है। लेकिन, अक्सर महिलाएं श्रद्धा में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठती हैं, जिससे पूजा का पूरा फल नहीं मिलता है, तो आइए उन कठिन नियमों को जानते हैं।

बरगद पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां

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शुभ मुहूर्त

वट सावित्री व्रत 16 मई को किया जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके बाद विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 4 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप किसी भी तरह का मांगलिक काम कर सकते हैं।

सूत बांधने की गलत दिशा

वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय कच्चा सूत या कलावा बांधा जाता है। ध्यान रहे कि परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में ही करनी चाहिए। विपरीत दिशा में घूमना अशुभ माना जाता है और इससे दोष लग सकता है।

वृक्ष को नुकसान पहुंचाना

सबसे बड़ी गलती जो अक्सर देखी जाती है, वह है पूजा के लिए बरगद की टहनियों को तोड़ना। शास्त्रों के अनुसार, जिस वृक्ष की हम पूजा कर रहे हैं, उसे चोट पहुंचाना या उसकी टहनी तोड़ना पाप का भागी बनाता है। अगर आप घर पर पूजा कर रही हैं, तो छोटा सा पौधा लाएं या उसके चित्र की पूजा करें, लेकिन टहनी न तोड़ें।

पूजा सामग्री में अशुद्धि

वट सावित्री की पूजा में काले या नीले रंग के वस्त्रों का प्रयोग वर्जित माना गया है। सुहागिन महिलाओं को लाल, पीला या नारंगी जैसे शुभ रंगों के वस्त्र ही पहनने चाहिए। साथ ही, बासी फूल या अशुद्ध जल का प्रयोग न करें।

कथा न सुनना या बीच में उठना

वट सावित्री व्रत का फल तभी मिलता है, जब आप सावित्री और सत्यवान की कथा पूरी श्रद्धा के साथ सुनती हैं। कथा के बीच में उठकर जाना या अन्य बातों में मन लगाना पूजा के संकल्प को तोड़ देता है।

बिना दान-दक्षिणा के पूजा का समापन

पूजा के बाद चने, फल और वस्त्र का दान करना जरूरी माना गया है। साथ ही इस दिन बड़ों का आशीर्वाद भी जरूर लेना चाहिए। खासकर अपनी सास का आशीर्वाद लिए बिना यह व्रत पूरा नहीं माना जाता।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताएं गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।