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अखंड सौभाग्य पाने का मौका: पंचांग के अंतर के कारण ज्येष्ठ माह में 2 बार रखा जाता है वट सावित्री व्रत

Published: Sat, 02 May 2026 10:08 AM (IST)

ज्येष्ठ माह में आने वाले वट सावित्री व्रत पर महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के ...और पढ़ें

वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह में दो बार क्यों मनाया जाता है?

वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह में दो बार क्यों मनाया जाता है?

HighLights

  1. ज्येष्ठ माह में दो बार रखा जाता है वट सावित्री व्रत

  2. पति की लंबी आयु के लिए किया जाता है यह व्रत

  3. क्षेत्रीय पंचांगों के मतभेद के कारण दो तिथियां

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पौराणिक कथाओं व मान्यताओं के अनुसार, सावित्री ने यमदेव को उसके पति सत्यवान के प्राण को लौटाने के लिए विवश कर दिया था। इसलिए विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री व्रत करती हैं।

इस दिन विशेष रूप से बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना की जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि ज्येष्ठ माह में वट सावित्री व्रत दो बार क्यों रखा जाता है? चलिए जानते हैं इसके पीछे का कारण।

वट सावित्री व्रत का महत्व

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावित्री ने मृत्यु के देवता भगवान यम को अपने पति सत्यवान के प्राण को लौटाने पर विवश किया था। इसलिए विवाहित महिलाएं अपने पति की सकुशलता और लंबी उम्र की कामना से वट सावित्री व्रत का पालन करती हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से अंखड सौभाग्य का आशीर्वाद तो मिलता ही है, साथ ही यह व्रत पति-पत्नी के रिश्तों को मजबूत कर है, वैवाहिक जीवन की परेशानियों को दूर करता है।

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(Picture Credit: Freepik) 

ये है दो बार व्रत का मुख्य कारण

तिथि और क्षेत्रों के भेद के कारण वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह में दो बार यानी एक ज्येष्ठ माह की अमावस्या और ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि पर किया जाता है। इसके साथ ही क्षेत्रीय मान्यताओं, पंचांगों के मतभेद और पौराणिक मान्यताओं में अंतर भी इसके प्रमुख कारण हैं।

जहां उत्तर भारत जैसे यूपी, बिहार आदि में पूर्णिमांत कैलेंडर के आधार पर ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर वट सावित्री का व्रत किया जाता है, वहीं पश्चिम/दक्षिण भारत जैसे महाराष्ट्र और गुजरात आदि राज्यों में अमांत कैलेंडर के आधार पर पूर्णिमा को यह व्रत रखा जाता है।

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(Picture Credit- AI Generated)

कब-कब पड़ेगा वट सावित्री व्रत?

भविष्य पुराण के अनुसार, पूर्णिमा तिथि पर वट सावित्री व्रत रखने का अधिक महत्व बताया गया है, जबकि कई अन्य धर्मग्रंथों में अमावस्या का उल्लेख है। कुल मिलाकर दोनों तिथियों पर व्रत रखने का फल समान माना गया है। चलिए जानते हैं कि दोनों व्रत कब रखे जाएंगे।

1. वट सावित्री व्रत

ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर किए जाने वाला वट सावित्री व्रत इस बार शनिवार 16 मई को किया जाएगा। इस दिन पर शनि जयंती भी मनाई जाती है।

2. वट सावित्री पूर्णिमा व्रत

ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि पर किए जाने वाले व्रत को वट सावित्री पूर्णिमा व्रत के नाम से भी जाना जाता है, जो इस बार सोमवार, 29 जून को किया जाएगा।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।