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Tulsi Puja: तुलसी की सेवा में ध्यान रखें ये बातें, देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की भी बनी रहेगी कृपा

हिंदू धर्म में तुलसी को देवी के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक सच्चे मन से देवी तुलसी की आराधना करता है उसके घर-परिवार पर मां लक्ष्मी की भी कृपा बनी रहती है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि किसी प्रकार तुलसी की सेवा करनी चाहिए और इस दौरान किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए।

By Suman Saini Edited By: Suman Saini Thu, 11 Jul 2024 10:40 AM (IST)
Tulsi Puja तुलसी की सेवा में ध्यान रखें ये बातें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कई घरों में तुलसी का पौधा पाया जाता है, जिसकी विशेष विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इससे न केवल मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, बल्कि जगत के पालनहार भगवान विष्णु की कृपा भी साधक पर बनी रहती है। चलिए जानते हैं कि तुलसी की सेवा किस प्रकार करनी चाहिए, ताकि आपको शुभ फलों की प्राप्ति हो सके।

जरूर रखें इस बातों का ध्यान

सबसे पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कभी भूलकर भी रविवार और एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं देना चाहिए और न ही तुलसी के पत्ते तोड़ने चाहिए। क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन तिथियों पर तुलसी जी भगवान विष्णु के निमित्त व्रत करती हैं।

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कर सकते हैं ये काम

समय-समय पर तुलसी की मंजरी को तोड़कर अलग करते रहना चाहिए। साथ ही जब भी आप तुलसी के पत्ते तोड़ें तो पत्तों को तोड़ने से पहले तुलसी माता को प्रणाम करें और तुलसी के पत्ते तोड़ते समय तुलसी के इस ध्यान मंत्र का जाप करें -

महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते ।।

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दिशा का भी रखें ध्यान

तुलसी के पौधे को हमेशा साफ-सुथरे स्थान पर ही रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र में तुलसी के पौधे को रखने के लिए पूर्व दिशा को सबसे बेहतर माना गया है। पूर्व दिशा को सकारात्मकता की दिशा माना जाता है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि तुलसी में हमेशा सुबह और सूर्यास्त से पहले जल देना चाहिए।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।