सुंदरकांड की वो चमत्कारी पंक्तियां, जिसे चौथे बड़े मंगल पर पढ़ने से संकट होंगे दूर
आज 26 मई को चौथे बड़े मंगल के अवसर पर हनुमान जी की कृपा पाने के लिए सुंदरकांड के चमत्कारी ...और पढ़ें
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सुंदरकांड की शक्तिशाली पंक्तियां (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 26 मई को चौथा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है। यह दिन हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन हनुमान जी की साधना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस दिन पूजा के दौरान हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ जरूर करना चाहिए।
इससे साधक के मन को शांति प्राप्ति होती है और हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अगर आप भी बजरंगबली की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो चौथे बड़े मंगल के दिन सुंदरकांड की इन पंक्तियों का पाठ करें। ऐसा माना जाता है कि इन पंक्तियों का पाठ करने से भय दूर होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। ऐसे में आइए पढ़ते हैं सुंदरकांड की पंक्तियां और उनके अर्थ के बारे में।

(Picture Credit- AI Generated)
सुंदरकांड की शक्तिशाली पंक्तियां
1. जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमान हृदय अति भाए॥
तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई। सहि दुख कंद मूल फल खाई॥
सुंदरकांड की इस पंक्ति का अर्थ है कि हनुमान जी के हृदय जामवंत जी के वचनों से खुश हुआ। उन्होंने कहा कि हे भाइयों! जब तक मैं माता सीता का पता लगाकर वापिस नहीं लौटू, तब तक आप कंद-मूल-फल खाकर मेरा इंतजार करें। यह शक्तिशाली पंक्ति जीवन में लोगों को धैर्य और आगे बढ़ने का साहस देती है।
2. कनक भूधराकार सरीरा। समर भयंकर अतिबल बीरा॥
सीता चरन बंदि तिन्ह धावा। अचलु महामुठि देइ गिरावा॥
हनुमान जी का शरीर सोने के पर्वत जैसा है, जो युद्ध में भयानक और पराक्रमी है। उन्होंने राक्षसों का अंत किया और मां माता सीता के चरणों की वंदना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पंक्ति का पाठ करने से साधक के रुके हुए काम पूरे होते हैं।
3. प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयं राखि कोसलपुर राजा॥
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
इस पंक्ति का अर्थ है कि अयोध्या के राजा भगवान श्री राम को दिल में रखकर नगर में प्रवेश करें और सब काम कीजिए। ऐसा करने पर विष भी अमृत हो जाता है और जीवन में शत्रु भी मित्र बन जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस पंक्ति का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।
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