नासिक, जागरण संवाददाता। नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ में प्रथम शाही स्नान के दौरान अपेक्षा से बहुत कम श्रद्धालुओं ने गोदावरी में डुबकी लगाई। इससे चिंतित प्रशासन अगले शाही स्नान के लिए अपनी नीतियों की समीक्षा में जुट गया है। ऐसा इस वजह से कि इसका मुख्य कारण पुलिस की सख्ती और यातायात व्यवस्था का सही इंतजाम नहीं होना माना जा रहा है। इसके अलावा रक्षाबंधन का त्योहार पडऩा और पड़ोसी राज्य गुजरात की स्थिति को भी कारण माना जा रहा है।

प्रशासन को उम्मीद थी कि इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा के दिन पड़े प्रथम शाही स्नान में नासिक में करीब 80 लाख एवं त्र्यंबकेश्वर में करीब 25 लाख श्रद्धालु क्रमश: गोदावरी के विभिन्न घाटों एवं कुशावर्त कुंड में डुबकी लगाएंगे। तैयारियां भी इसी के अनुरूप थीं लेकिन श्रद्धालुओं की आमद अपेक्षा का दसवां हिस्सा भी नहीं हुई। इसे कुंभ के विफल होने के रूप में देखा जा रहा है एवं आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

नासिक मूल के निवासी पूर्व मंत्री छगन भुजबल के अनुसार, स्थानीय लोग पिछले दो-तीन वर्षों से सिंहस्थ कुंभ की बाट जोह रहे थे। लेकिन पुलिस विभाग की सख्ती के कारण स्थानीय लोग न तो स्वयं घर से बाहर निकले, न ही अपने रिश्तेदारों को नासिक कुंभ में आने का निमंत्रण भेजा। नासिक के प्रभारी मंत्री गिरीश महाजन ने श्रद्धालुओं की कम आमद की बात स्वीकारते हुए कहा कि वह पूरी स्थिति की समीक्षा करेंगे। साथ ही प्रथम शाही स्नान में रह गई कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा ताकि 13, 18 एवं 25 सितंबर के शाही स्नानों में पर्याप्त संख्या में श्रद्धालु आ सकें।

श्रद्धालुओं के कम आने के कई कारण गिनाए जा रहे हैं। इनमें पहला और महत्वपूर्ण कारण पुलिस की सख्ती, यातायात व स्नान की व्यवस्था में किया गया बदलाव है। स्थानीय निवासी चंद्रशेखर गोसावी कहते हैं कि जगह-जगह प्रवेश प्रतिबंधित कर देने से स्थानीय लोगों ने पुलिस की सख्ती झेलने के बजाय घर पर ही रहना पसंद किया। आसपास के जिलों से आनेवाले उनके रिश्तेदार भी अत्यंत असुविधाजनक बना दी गई यातायात व्यवस्था के कारण नासिक आने से कतरा गए। क्योंकि शाही स्नान के दिन बाहर से आनेवाले वाहनों को नासिक-त्र्यंबकेश्वर से 12 से 15 किलोमीटर दूर ही रोक दिया गया है। घाट के निकट तक पहुंचने के लिए सरकारी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है।

नासिक-त्र्यंबकेश्वर के सबसे नजदीकी राज्य गुजरात में दो दिन पहले हुई अप्रिय घटनाएं भी श्रद्धालुओं के कम आने का कारण बनीं। गुजरात से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। आरक्षण आंदोलन के कारण वे नहीं आ सके। महाराष्ट्र का लोकप्रिय त्योहार नारियल पूर्णिमा एवं रक्षा बंधन भी कम आमद का एक कारण बना। पिछले नासिक कुंभ एवं 2012 के प्रयाग कुंभ में हुई भगदड़ एवं भीड़भाड़ में आतंकी हमले का खौफ भी श्रद्धालुओं पर हावी हुआ दिखाई दिया।

Posted By: Rajesh Niranjan

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