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ऋषि पंचमी 2026: महिलाएं ही क्यों रखती हैं यह व्रत, इस दिन 108 बार दातून करने का क्या है महत्व 

Published: Thu, 10 Sep 2026 06:00 PM (IST)Updated: Fri, 11 Sep 2026 12:05 PM (IST)

ऋषि पंचमी का त्योहार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, इस वर्ष यह 15 ...और पढ़ें

ऋषि पंचमी व्रत नियम। (Picture Credit- AI Generated)नियम

ऋषि पंचमी व्रत नियम। (Picture Credit- AI Generated)नियम

HighLights

  1. ऋषि पंचमी व्रत 15 सितंबर को मनाया जाएगा।

  2. महिलाएं पीरियड्स की गलतियों के प्रायश्चित हेतु व्रत रखती हैं।

  3. व्रत में 108 दातुन और स्नान का विशेष विधान है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूरे साल कई व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, इन्हीं में से एक है ऋषि पंचमी।इस दिन मुख्य रूप से महिलाएं व्रत रखती हैं और एक विशेष परंपरा का पालन करके इस व्रत को पूरा किया जाता है। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी मनाई जाती है। इस साल ये पर्व 15 सितंबर को मनाया जाएगा।आइए जानते हैं इस व्रत के पीछे की मान्यता, 108 बार दातून करने का महत्व और इसकी पूजा विधि के बारे में विस्तार से।

ऋषि पंचमी व्रत विधि

  • इस दिन सुबह उठकर सबसे सबसे पहले अधजड़ा (चिरचिटा ) के तने का दातुन किया जाता है। व्रत की विधि को पूरा करने के लिए 108 दातुन होने चाहिए और इनसे एक-एक करके दांतों को साफ करना होता है।
  • दातुन करने के बाद सभी प्रयोग किए गए 108 दातुनों को अपने सिर पर रखें और फिर 108 बार किसी पात्र से अपने सिर पर पानी डालकर स्नान करें। इसके बाद आप साधारण साफ पानी से भी स्नान कर सकती हैं।
  • बाद में सप्तऋषियों की विधि-विधान से पूजा करें। इसके लिए सप्‍तऋषि और अरुंधति की स्‍थापना करें। इनकी पूजा करने के बाद व्रत का संकल्‍प करें। शाम को व्रत कथा सुनने के बाद व्रत का उद्यापन करें।

महिलाएं ही क्‍यों रखती हैं यह व्रत?

इस व्रत का रखने का उद्देश्‍य बहुत ही अलग और खास है। पीरियड्स के समय महिलाओं से जो भी जाने-अनजाने में गलतियां हो जाती हैं, उनका प्रायश्चित करने के लिए महिलाएं यह व्रत रखती हैं। दरअसल, पीरियड्स के समय बहुत छुआछूत मानी जाती है। कई बार भूलवश महिलाओं से कुछ ऐसा हो जाता है, जो नहीं होना चाहिए, तो उस गलती को सुधारने के लिए यह व्रत रखा जाता है और अपनी गलतियों की माफी मांगी जाती है।

अतः वर्तमान समय में वक्त के साथ-साथ पूजा-पाठ के तौर-तरीके और नियम-कायदे थोड़े बहुत बदल गए हैं। मगर इसका अर्थ यह नहीं है कि ऋषि पंचमी के व्रत का महत्व कम हो गया है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है