क्या सच में खड़े होकर पानी पीना है जल देवता का अपमान? ज्योतिष में बताए गए कुछ खास नियम
भारतीय परंपरा में बैठकर पानी पीने की सलाह दी जाती है। लेकिन, क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं? यहां पढ़ें इसका धार्मिक मतलब।

क्या आप भी खड़े होकर पीते हैं पानी? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आपने घर में बड़े-बुजुर्ग अक्सर खड़े होकर पानी पीने को लेकर मना करते हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि वो ऐसा क्यों कहते हैं? दरअसल, भारतीय संस्कृति में पानी सिर्फ प्यास बुझाने की चीज नहीं, बल्कि जीवन का मुख्य आधार भी माना गया है। इसे एक पवित्र तत्व का दर्जा दिया गया है।
यही वजह है कि हमारे यहां पानी पीने के भी कुछ खास नियम और शिष्टाचार बताए गए हैं। आइए इस आर्टिकल में समझते हैं कि बैठकर पानी पीना क्यों जरूरी है।
जल का सम्मान और मानसिक शांति
सनातन धर्म में पानी को जीवनदायिनी (जीवन देने वाला) माना गया है। शास्त्रों में दैनिक दिनचर्या के जो नियम हैं, वे हमें अनुशासन सिखाते हैं। मान्यता है कि पानी हमेशा शांत भाव से और बैठकर ही पीना चाहिए। भागते-दौड़ते या खड़े होकर पानी पीना जल देवता का अपमान माना जाता है। कहा यह भी जाता है कि जब हम तसल्ली से बैठकर पानी पीते हैं, तो हमारे दिमाग और मन दोनों में स्थिरता और शांति बनी रहती है।
जल तत्व का सही संतुलन
इस बात से हर कोई वाकिफ है कि हमारा शरीर पांच तत्वों से बना है, जिसमें जल बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुरानी मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आराम से बैठकर पानी पीने से शरीर के अंदर जल तत्व का संतुलन एकदम सही रहता है। इसके उलट, जो लोग हमेशा खड़े होकर या चलते-फिरते पानी पीते हैं, उनके स्वभाव में बेवजह की चंचलता और बेचैनी आ सकती है।
इस बारे में क्या कहता है आयुर्वेद?
आयुर्वेद में भी खान-पान के तरीकों पर बहुत ध्यान दिया गया है। इसके अनुसार, पानी हमेशा घूंट-घूंट करके और बैठकर पीना चाहिए। अक्सर यह दावा किया जाता है कि खड़े होकर पानी पीने से घुटनों (जोड़ों) में दर्द होता है या आंतों व किडनी पर असर पड़ता है। हालांकि, आधुनिक मेडिकल साइंस सीधे तौर पर इन बीमारियों की पुष्टि नहीं करता, लेकिन विज्ञान भी इसे एक स्वस्थ और संयमित आदत जरूर मानता है।
सही तरीका क्या है?
पानी पीते समय आराम से किसी जगह बैठ जाना और धीरे-धीरे घूंट लेकर पीना सबसे अच्छी और सेहतमंद आदत है। यह न सिर्फ हमारी सदियों पुरानी परंपरा का सम्मान है, बल्कि शरीर को रिलैक्स करने का एक बेहतरीन तरीका भी है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
