पूजा के बाद सिर्फ माथे पर ही नहीं, शरीर के इन अंगों पर भी लगाया जाता है चंदन, धार्मिक महत्व पढ़ें
पूजा के बाद माथे के अलावा कंठ और नाभि पर चंदन लगाने की क्या मान्यता है? जानिए शरीर के अलग-अलग अंगों पर चंदन धारण करने का धार्मिक महत्व।
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चंदन धारण करने का धार्मिक महत्व (AI-Generated Image)
HighLights
माथे पर चंदन एकाग्रता और शांति के लिए लगाया जाता है
कंठ पर तिलक भगवान के स्मरण से जोड़ता है
हृदय पर चंदन ईश्वर के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ या कोई भी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान इस्तेमाल होने वाली चीजों का अपना अलग महत्व बताया गया है। फूल, अक्षत, रोली और दीपक की तरह चंदन भी पूजा की प्रमुख सामग्रियों में शामिल है।
भगवान विष्णु की पूजा में चंदन अर्पित करने की परंपरा विशेष रूप से देखने को मिलती है। पूजा के बाद श्रद्धालु आमतौर पर चंदन का तिलक माथे पर लगाते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि धार्मिक परंपराओं में शरीर के कुछ दूसरे अंगों पर भी चंदन या तिलक धारण करने का उल्लेख मिलता है?
माथे पर चंदन लगाने की मान्यता
आपने देखा होगा कि लोग माथे पर चंदन लगाते हैं। इसका तिलक लगाने की परंपरा बहुत आम है। धार्मिक दृष्टि से देखें तो इसे एकाग्रता, शांति और सात्विक विचारों से जोड़ा जाता है। खासतौर पर पूजा और ध्यान के समय चंदन का तिलक लगाने से मन को पूजा में लगाने की भावना मानी जाती है। चंदन को ठंडा माना गया है। इसकी ठंडक भी इसे इस परंपरा से जोड़ती है।
कंठ पर चंदन लगाने का महत्व
कंठ यानी गले का स्थान भी तिलक धारण करने की परंपरा में महत्वपूर्ण माना गया है। वैष्णव परंपरा में शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर भगवान विष्णु के नामों का स्मरण करते हुए तिलक लगाने का उल्लेख मिलता है। इसे शरीर को भगवान के स्मरण से जोड़ने वाली साधना माना जाता है।
हृदय पर चंदन क्यों लगाया जाता है?
हिंदु धर्म में हृदय को भावनाओं और भक्ति से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता में हृदय पर चंदन या तिलक लगाने को ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना का प्रतीक माना जाता है। पद्म पुराण से जुड़ी वैष्णव तिलक परंपरा में हृदय/वक्षस्थल पर भी तिलक लगाने का उल्लेख मिलता है।
नाभि पर चंदन लगाने की मान्यता
नाभि को शरीर का बेहद जरूरी केंद्र माना गया है। कुछ धार्मिक परंपराओं में नाभि और उदर (पेट) पर भी तिलक धारण करने की विधि बताई गई है। हालांकि, अलग-अलग संप्रदायों और परंपराओं में इसके तरीके अलग हो सकते हैं। इसलिए, इसे किसी जरूरी नियम की तरह नहीं, बल्कि धार्मिक परंपरा के रूप में समझना बेहतर है।
क्या कहते हैं शास्त्र?
पद्म पुराण की वैष्णव परंपरा में शरीर के 12 स्थानों पर तिलक लगाने का उल्लेख मिलता है। इनमें माथा, उदर, वक्षस्थल (छाती या सीना), कंठ (गला), भुजाएं (हाथ) और शरीर के आदि हिस्से शामिल हैं। चंदन से तिलक करने की परंपरा को भगवान विष्णु की आराधना से भी जोड़ा गया है।
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