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पूजा-पाठ हो या कोई अनुष्ठान, पत्नी हमेशा पति के बाईं ओर ही क्यों बैठती है? शास्त्रों में बताए गए हैं ये कारण

Published: Thu, 13 Aug 2026 02:46 PM (IST)

जानें शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार वामांगी, अर्धनारीश्वर और शक्ति तत्व से जुड़ा धार्मिक कारण। समझें इस परंपरा के पीछे छिपा आध्यात्मिक महत्व और मान्यता।

जानें वामांगी का आध्यात्मिक महत्व । (Picture Credit- AI Generated)

 जानें वामांगी का आध्यात्मिक महत्व । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शादी के मंडप से लेकर घर में होने वाले पूजा-पाठ तक में पत्नी को हमेशा पति के बाईं ओर ही बैठा पाया जाता है। कई बार मन में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्‍यों करा जाता है? हिंदू शास्‍त्रों में इस बारे में विस्‍तार से बताया गया है। हमने इस विषय पर एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषाचार्य चंद्रेश जी से बात की। वह कहते हैं, "हिंदू धर्म में पत्नी को पति का बायां अंग कहा जाता है। वामांगी होने के कारण पत्नी पति के बाएं अंग की अधिकारी होती है। इसलिए उसे हमेशा पति के बाईं ओर ही रहना होता है।"

इसके साथ ही, वामांगी शब्द केवल एक नाम नहीं, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते में समानता, सम्मान और एक-दूसरे के पूरक होने का वैदिक प्रमाण है।चलिए इस बारे में विस्‍तार से जानते हैं।

वामांगी कहने के मुख्य कारण और आध्यात्मिक महत्व

शास्त्रों और परंपराओं में पत्नी को बाएं स्थान पर बिठाने के मुख्य कारण बताए गए हैं:

अर्धनारीश्वर स्वरूप: भगवान शिव का 'अर्धनारीश्वर' रूप यह दर्शाता है कि पुरुष और स्त्री मिलकर ही पूर्ण होते हैं। इस स्वरूप में भगवान शिव के बाएं हिस्से में माता पार्वती विराजमान हैं। यही कारण है कि पत्नी को वामांगी कहा जाता है।

बाएं स्थान का आध्यात्मिक महत्व: शास्त्रों के अनुसार, शरीर का दायां भाग पुरुष तत्व (बल, मजबूती और कठोरता) का प्रतीक है, जबकि बायां भाग स्त्री तत्व (सौम्यता, प्रेम और करुणा) का प्रतीक है। हृदय शरीर के बाईं ओर होता है, जिसका अर्थ है कि पत्नी पति के हृदय के समीप स्थान पाती है।

धार्मिक कार्यों में स्थान के नियम: पूजा-पाठ, यज्ञ और कन्यादान जैसे शुभ और धार्मिक कार्यों में पत्नी को पति के बाईं ओर रहना चाहिए। सिंदूरदान, विवाह और शयन के समय पत्‍नी को पति के बाएं ओर रहना चाहिए।

चंद्र नाड़ी का प्रभाव: पुरुष के शरीर का दाहिना भाग सूर्य नाड़ी के अंतर्गत आता है और बायां भाग चंद्र नाड़ी के अंतर्गत आता है। ऐसे में पत्‍नी पति के बाईं ओर बैठती है तो संतुलन बना रहता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है