यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 04, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कमजोर पड़ती जा रही पति-पत्नी के बीच रिश्ते की डोर
भारतीय सभ्यता और संस्कृति में मान्यता है कि शादियां ईश्वर के यहां तय हो जाती है।

बेतिया। भारतीय सभ्यता और संस्कृति में मान्यता है कि शादियां ईश्वर के यहां तय हो जाती है। ईश्वर की मर्जी से ही स्त्री और पुरुष शादी के बंधन में बंधते हैं। इतना ही नहीं भारतीय संस्कृति में मानी जाती है कि पति-पत्नी का संबंध एक जन्मों का नहीं वरन कई जन्मों या जन्म जन्मांतर का होता है। हर सुख दुख में पति-पत्नी एक दूसरे का सहयोगी और साथी बन कर साथ निभाते हैं। लेकिन हावी होते आर्थिक और भौतिकवादी संस्कृति के कारण पति पत्नी के रिश्ते का डोरा अब दरकता दिख रहा है। भावनाओं का ज्वार कम हो रहा है। इस भावनात्मक रिश्ते पर कई बार अहंकार और अहम भारी पड़ता दिख रहा है। पति पत्नी के मामूली नोक झोंक और विवाद थाना और कोर्ट कचहरी तक पहुंच रहा है। इसका बुरा असर बच्चों, परिवार और समाज पर भी पड़ रहा है। पति पत्नी के मामूली विवाद के कारण कई बार परिवार का परिवार तबाह हो जाता।
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मामूली विवाद में बिखर रहा परिवार
पति-पत्नी की रिश्तों का डोर कमजोर होने के कारण मामूली विवाद में भी कई बार परिवार का परिवार तबाह हो रहा। जिले में लगभग संयुक्त परिवार की परंपरा टूट चुकी है। इस कारण कई वर्जनाएं भी टूटी है। अब स्त्रियां भी घर से निकाल कामकाज कर रही है। समाज में व्यक्तित्व का का बढ़ता प्रभाव, आर्थिक उन्नति और प्रगति कई बार पति-पत्नी के अहम के टकराव का कारण बन जाता है। भावनात्मक रिक्तता इसे और बढ़ा देता है। हम बड़े, तो हम बड़े के कारण मनमुटाव घटने के बजाय बढ़ने लगता। ऐसी परिस्थिति में उनके मनमुटाव घर के दहलीज से निकाल कर थाना और कोर्ट कचहरी तक पहुंच जाता है। इसका असर छोटे-छोटे बच्चों पर पड़ता है। मनोविज्ञान के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ कामता प्रसाद का कहना है कि परिस्थितियां बदलने से समाज की कई पर वर्जनाएं टूट चुकी है। इसका असर पति पत्नी के रिश्तों पर भी पड़ा है।
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बड़े बुजुर्ग की है अहम भूमिका
पति पत्नी के बीच के विवाद कि कई मामले जिले की विभिन्न थानों में दर्ज है। ढेरों मामले कोर्ट में भी चल रहे हैं। बेतिया पुलिस जिला के महिला थानाध्यक्ष आरसी उपाध्याय का कहना है कि पति पत्नी की विवाद से जुड़े कई मामले उनके पास आते हैं। इसमें कुछ मामले तो संगीन होते हैं। लेकिन अधिकतर मामले शुरुआती मामूली विवाद को नहीं सुलझाने के कारण बड़ा रूप लेता दिखाई पड़ता है। थानाध्यक्ष का कहना है कि यदि पति पत्नी शुरुआती विवाद को घर पर सुलझा लें या इसमें बड़े बुजुर्गों का सहयोग लेकर निपटारा कर ले तो काफी हद तक मामला वहीं खत्म हो सकता है। इससे परिवार टूटने से बच सकता है।
