Rang Panchami 2026: रंग पंचमी पर करें भगवान कृष्ण की आरती, रंगों से भर जाएगा जीवन
रंग पंचमी (Rang Panchami 2026) होली उत्सव का समापन करती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा का विशेष महत्व है।

Rang Panchami 2026: रंग पंचमी पर करें ये आरती। (Ai Generated Image)
HighLights
होली के उत्सव का समापन रंग पंचमी के साथ होता है
इस साल यह पर्व 8 मार्च यानी आज के दिन मनाया जा रहा है
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा का विशेष महत्व है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। होली के उत्सव का समापन रंग पंचमी के साथ होता है। यह पर्व सिर्फ रंग खेलने का नहीं, बल्कि देवताओं के प्रति अपनी श्रद्धा दिखाने का भी है। इस साल यह पर्व 8 मार्च यानी आज के दिन मनाया जा रहा है। रंग पंचमी पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन (Rang Panchami 2026) ब्रज के कन्हैया और राधा रानी की आरती और पूजा करने से भक्त का जीवन खुशियों के सात रंगों से भर जाता है, तो आइए भव्य आरती करके उनकी विशेष कृपा प्राप्त करते हैं।
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॥श्रीकृष्ण जी की आरती॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्री बनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
॥आरती श्री राधा रानी जी की ॥
आरती राधाजी की कीजै।
कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा।
आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती
कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई।
उस शक्ति की आरती कीजै। आरती
नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास रचाई।
आरती रास रसाई की कीजै। आरती
प्रेम राह जिनसे बतलाई, निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई।
आरती राधाजी की कीजै। आरती
दुनिया की जो रक्षा करती, भक्तजनों के दुख सब हरती।
आरती दु:ख हरणीजी की कीजै। आरती
दुनिया की जो जननी कहावे, निज पुत्रों की धीर बंधावे।
आरती जगत माता की कीजै। आरती
निज पुत्रों के काज संवारे, रनवीरा के कष्ट निवारे।
आरती विश्वमाता की कीजै। आरती राधाजी की।
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