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Ramayan की मंथरा के चरित्र से सीखें ये 5 जरूरी बातें, सही से अपनाएंगे तो करियर में होंगे फायदे

Published: Fri, 18 Sep 2026 02:57 PM (IST)

रामायण की मंथरा के चरित्र को अक्सर नकारात्मक देखा जाता है, लेकिन इससे करियर और व्यक्तिगत जीवन के लिए कई सकारात्मक सीखें ली जा सकती हैं।

रामायण की मंथरा से सीखें सफल करियर के सूत्र ।  (Picture Credit- AI Generated)

रामायण की मंथरा से सीखें सफल करियर के सूत्र ।  (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण की कथा में जब ऐसे पात्रों की बात की जाती है, जिन्‍हें सबसे बड़ा विलेन माना गया, तब मंथरा का नाम सबसे पहले जहन में आता है। मंथरा का चरित्र आमतौर पर नकारात्मक रूप में देखा जाता है। कैकेयी को दिए गए उसके सुझावों के कारण ही भगवान श्री राम को वनवास जाना पड़ा था। लेकिन किसी भी चरित्र के व्यवहार से सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह की सीख ली जा सकती है।

अगर मंथरा के चरित्र को थोड़ा सकारात्मक तरीके से देखा जाए, तो वर्तमान समय में हम और आप उससे कई बातें सीख सकते हैं, जो हमारे करियर, कार्यस्थल और पर्सनल लाइफ में भी हमें फायदा पहुंचा सकती हैं। चलिए तो जानते हैं मंथरा के चरित्र से क्‍या सीखा जा सकता है।

अपने काम और टीम के प्रति समर्पित रहें

रामायण में मंथरा को कैकेयी के प्रति समर्पित पात्र के रूप में दिखाया गया है। वह कैकेयी और भरत के हितों को लेकर सक्रिय रहती थी। हालांकि, उसके तरीकों को सही नहीं माना जाता, लेकिन किसी व्यक्ति या जिम्मेदारी के प्रति उसकी ईमानदारी से एक सकारात्मक सीख ली जा सकती है। ऑफिस में अपने काम, टीम और जिम्मेदारियों के प्रति ईमानदार रहना आपको भरोसेमंद बनाता है। जब आप समय पर काम पूरा करते हैं और मुश्किल समय में टीम का साथ देते हैं, तो वरिष्ठों का विश्वास आप पर बढ़ सकता है।

अपनी बात प्रभावी तरीके से रखना सीखें

मंथरा की एक प्रमुख विशेषता उसकी बातचीत करने की शैली थी। वह देवी कैकेयी के आगे अपनी बातों को इतने प्रभावशाली तरीके से रखती थी कि कैकेयी कभी भी उसकी बातों को मानने से इनकार नहीं कर पाती थी। इस तरह के प्रभावी संवाद करने की शैली को जरूर सीखना चाहिए। यह कला अपने आप में उपयोगी कौशल है।

कार्यस्‍थल पर अपना विचार रखना हो, तब अपनी बात स्पष्ट और तर्क के साथ रखना जरूरी है। दूसरों पर दबाव डालने के बजाय तथ्यों और अच्छे तर्कों के माध्यम से उन्हें समझाना ज्यादा सकारात्मक तरीका होता है।

परिस्थितियों को ध्यान से समझें

मंथरा महल में होने वाली घटनाओं पर नजर रखती थी और परिस्थितियों को जोड़कर आगे की स्थिति को समझने की कोशिश करती थी। उसके इस व्यवहार से ऑब्जर्वेशन और रणनीतिक सोच की सीख ली जा सकती है।

कार्यक्षेत्र में होने वाले बदलाव, नई तकनीक, बाजार की जरूरत और कंपनी की दिशा पर नजर रखें। जितनी अच्छी जानकारी आपके पास होगी, उतना ही बेहतर आप अपने काम की योजना बना पाएंगे।

बदलाव को पहचानें और योजना बनाएं

राम के राज्याभिषेक की खबर मिलने के बाद मंथरा तुरंत सक्रिय हो गई थी। करियर में भी हर वक्‍त सक्रिय रहना बहुत जरूरी है। दुनिया तेजी से बदल रही है और नई चीजों के बारे में जानने के लिए आपको हर वक्‍त उत्‍सुक रहना चाहिए। नई जिम्मेदारी, नई भूमिका या इंडस्ट्री में बदलाव की संभावना दिखाई दे तो उसके अनुसार तुरंत ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।

अपना प्रभाव पैदा करें

मंथरा के पास कोई बड़ा राजकीय पद नहीं था, फिर भी उसकी बातों का कैकेयी पर प्रभाव पड़ा। इससे आधुनिक कार्यस्थल के लिए लीडरशिप विदाउट टाइटल यानी बिना पद के नेतृत्व की अवधारणा को समझा जा सकता है।हर प्रभावशाली व्यक्ति मैनेजर या बॉस नहीं होता। मगर अपने विचारों से टीम को लीड कर सकता है।

अतः रामायण के इस पात्र को एक अलग नजरिए से देखकर हम समझ सकते हैं कि किसी भी कौशल का परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य और तरीके से किया जा रहा है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।