Ram Mandir Bhumi Pujan: भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या में आज वर्षों बाद मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन होने जा रहा है। राम राज्य की स्थापना करने वाले मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम सदा से ही अपने जन्मभूमि में विराजते रहे हैं और करोड़ों भक्तों के हृदय में विद्यमान रहते हैं। भूमि पूजन के साथ ही आज से राम मंदिर निर्माण का शुभारंभ हो जाएगा। राम नगरी अयोध्या अपने रघुनंदन के प्रेम से सराबोर होकर सदैव ही जय श्री राम का जयघोष करती है, आज दिव्य रूप लिए अपने आराध्य के मंदिर निर्माण के लिए उत्सुक है। मंदिर भूमि पूजन के इस अवसर पर आज हम सबको भगवान राम के जीवन के उन 10 प्रमुख बातों के बारे में जानना चाहिए, जो हमारे लिए प्रेरणा है।

1. भगवान श्रीराम मर्यादा पुरूषोत्तम हैं। उनका चरित्र और व्यक्तित्व सभी पुरूषों से श्रेष्ठ और उत्तम है, इसलिए वे मर्यादा पुरूषोत्तम कहलाए।

2. भगवान राम अपने वचन के पक्के थे। वे किसी को झूठा वचन नहीं देते थे। सदा सत्य बोलने वाले थे। तभी तो रघुकुल के बारे में कहा गया है— रघुकुल रीति सदा चल आई, प्राण जाए पर वचन न जाई।

3. वह पत्नी व्रता पुरुष थे। उनके जीवनकाल में माता सीता के अलावा कोई दूसरी स्त्री नहीं रही। जब रावण की बहन शूर्पणखा ने उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने उसे लक्ष्मण जी के पास उसे भेजा और उन्होंने उसकी नाक काट ली। इतना ही नहीं, जब माता सीता को वन जाना पड़ा तो भी उन्होंने दूसरा विवाह नहीं किया। यज्ञ के दौरान सीता जी की प्रतिमा को साथ में रखकर पूजा संपन्न की।

4. भगवान राम अत्यंत धैर्यवान पुरुष थे। इस संसार के पालक स्वयं समुद्र के सामने जाकर लंका गमन के लिए मार्ग देने का निवेदन करते हैं। मुश्किल घड़ी में भी वे अपना धैर्य नहीं खोते।

5. प्रभु श्रीराम दूसरों को सम्मान देते थे, चाहें उनका परम शत्रु रावण ही क्यों न हो। रावण जब युद्ध भूमि में अपने जीवन की आखिरी घड़ियां गिन रहा था, तो उन्होंने लक्ष्मण जी को उसके पास ज्ञान प्राप्ति के लिए भेजा। उनको पता था कि रावण जैसा प्रकांड विद्वान कोई नहीं था।

6. भगवान राम अपने माता और पिता के आज्ञाकारी पुत्र थे। उन्होंने माता कैकेयी की इच्छा और पिता दशरथ के दिए वचन के सम्मान के लिए वनवास स्वीकार किया।

7. रघुकुल नंदन राम अपनी मित्रता के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने वनवास के समय सुग्रीव को वचन दिया था कि उनको उनका राज्य वापस दिलाएंगे। अपने मित्र की सहायता के लिए उन्होंने बालि का वध किया।

8. भगवान राम की वीरता के किस्से पूरे रामायण में भरे पड़े हैं। लंका विजय हो या बालि वध या फिर ऋषि मुनियों को असुरों के भय से मुक्त करना या फिर स्वयंवर में भगवान शिव के धनुष को तोड़ना। ये सब किस्से उनकी वीरता और अदम्य साहस के प्रमाण हैं।

9. प्रभु श्रीराम जितने वीर, धैर्यवान, आज्ञाकारी थे, उतने ही करुणामय थे। दूसरों के प्रति दया का भाव रखने वाले ​थे। अहिल्या के उद्धार की कथा हो या फिर केवट प्रेम।

10. राम राज्य के संस्थापक। वन से लौटकर अयोध्या की गद्दी संभालने के बाद श्री राम का शासन संसार के सामने अमर प्रमाण बन गया। उनके राज्य में सब समान थे, कोई भेद न था, राज्य में सबके लिए समान नियम थे। सब खुशहाल थे।

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