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आज से शुरू हो रहा 'राज पंचक', इन 5 दिनों में कौन-से काम करने की है सख्त मनाही

Published: Wed, 23 Sep 2026 09:09 AM (IST)

राज पंचक आज से शुरू हो गया है। ज्योतिष शास्त्र में पंचक को शुभ नहीं माना जाता। जानें राज पंचक ...और पढ़ें

राज पंचक में क्या करें क्या नहीं? (AI-Generated image)

राज पंचक में क्या करें क्या नहीं? (AI-Generated image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कोई भी नया या शुभ काम शुरू करने से पहले शुभ मुहूर्त देखने की परंपरा है। इसी तरह, कुछ ऐसी अवधि भी है जिनमें मांगलिक कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है। इन्हीं में से एक 'पंचक' है।

आज यानी 23 सितंबर से पंचक काल की शुरुआत हो रही है। पंचांग के अनुसार, धनिष्ठा से लेकर रेवती तक के पांच नक्षत्रों के इस समूह को पंचक कहा जाता है और यह 5 दिनों के लिए लगता है।

राज पंचक का समय और महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक का नाम इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस दिन शुरू हो रहा है। इस बार पंचक बुधवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे 'राज पंचक' कहा जाता है। यह 23 सितंबर की रात 9 बजकर 57 मिनट से आरंभ होकर 28 सितंबर की सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगा।

दरअसल, राज पंचक को अन्य पंचकों (जैसे शनिवार से शुरू होने वाले बेहद अशुभ 'मृत्यु पंचक') की तुलना में शुभ और दोष-मुक्त माना जाता है। लेकिन, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक चाहे कोई भी हो, कुछ विशेष कार्यों से हमेशा बचने की सलाह ही दी जाती है।

पंचक के दौरान न करें ये काम:

  • इन 5 दिनों में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करने से बचें, क्योंकि इसे यम (मृत्यु के देवता) की दिशा माना जाता है।
  • पंचक में घर की छत ढलवाने की मनाही होती है। मान्यता है कि इससे घर में क्लेश बढ़ता है और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
  • इस दौरान घर में घास, लकड़ी या जलने वाली कोई भी चीज भारी मात्रा में इकट्ठी नहीं करनी चाहिए।
  • पंचक में चारपाई या पलंग बनवाना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि यह किसी बड़े संकट को न्योता देने जैसा है।
  • किसी भी तरह के नए निर्माण कार्य की शुरुआत या नए औजार और भारी मशीनरी से जुड़ा कोई भी काम इस समय टाल देना चाहिए।

पंचक के प्रभाव से कैसे बचें?

  • रोजाना सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में पानी, थोड़ा सा लाल चंदन और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • पंचक के दिनों में हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें।
  • भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप बहुत प्रभावशाली माना जाता है।
  • अपनी क्षमता के अनुसार इस दौरान किसी जरूरतमंद को दान देना भी पुण्यकारी माना गया है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।