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राधा अष्टमी पर लड्डू गोपाल की पूजा क्यों जरूरी मानी जाती है? पढ़ें इसके पीछे का रहस्य

Published: Mon, 14 Sep 2026 07:00 PM (IST)

राधा अष्टमी पर राधा रानी के साथ लड्डू गोपाल की पूजा भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के ...और पढ़ें

राधा रानी के साथ लड्डू गोपाल की पूजा  का महत्व  (Picture Credit: AI Generated)

राधा रानी के साथ लड्डू गोपाल की पूजा  का महत्व  (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. राधा अष्टमी पर राधा रानी के साथ लड्डू गोपाल की पूजा आवश्यक।

  2. ब्रह्मवैवर्त पुराण बताता है राधा और कृष्ण एक ही हैं।

  3. लड्डू गोपाल की पूजा के बिना राधा रानी की पूजा अधूरी।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जिस तरह श्री कृष्ण का जन्मदिवस विशेष रूप से जन्माष्टमी के दिन मनाया जाता है, उसी तरह से राधा अष्टमी को किशोरी जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह श्री कृष्ण जन्मोत्सव के ठीक 15 दिन बाद मनाई जाती है। इस दिन विधि-विधान के साथ राधा रानी का श्रृंगार और पूजन किया जाता है।

भक्त इस दिन राधा रानी के साथ श्री कृष्ण का भी पूजन करते हैं और घर की खुशहाली की कामना करते हैं। वहीं एक मान्यता यह भी है कि राधा अष्टमी के दिन लड्डू गोपाल की पूजा भी जरूरी है। कहा जाता है कि जो घर में लड्डू गोपाल की पूजा के बिना राधा जी की पूजा करता है उसकी पूजा को पूर्ण नहीं माना जाता है। आइए आपको बताते हैं इसके कारणों के बारे में और राधा अष्टमी पर लड्डू गोपाल की पूजा और सेवा के महत्व के बारे में।

राधा अष्टमी कब मनाई जाती है?

राधा अष्टमी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। परंपरा के अनुसार, इसी दिन बरसाना में राधा रानी का जन्म हुआ था। भक्तों के लिए, राधारानी निस्वार्थ भक्ति और भगवान कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक हैं।

राधा के भक्तों के लिए, राधा न केवल कृष्ण से जुड़े दिव्य प्रेम की देवी हैं, बल्कि वे करुणा, दया और निस्वार्थ भक्ति जैसे गुणों का भी प्रतीक हैं। कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को एक ऐसी शुद्ध भक्ति माना जाता है जो विश्वास और बिना किसी इच्छा के भाव पर आधारित है। यही नहीं पुराणों में यह भी बताया गया है कि राधा रानी और कृष्ण जी एक ही हैं और इसी वजह से इनका नाम भी राधे-कृष्ण बोला जाता है।

राधा अष्टमी के दिन लड्डू गोपाल की पूजा जरूरी क्यों है?

राधा अष्टमी का त्योहार पूरे देश में श्रद्धा से मनाया जाता है, लेकिन मुख्य रूप से बरसाना, मथुरा और वृंदावन में इस पर्व की धूम होती है। इस दिन घरों में लोग राधा रानी की पूजा करते हैं और उनके 108 नामों का जाप करते हैं। वहीं इस दिन लड्डू गोपाल को भी विधि पूर्वक स्नान कराया जाता है और उनकी पूजा की जाती है।

इस दिन लड्डू गोपाल की पूजा जरूरी इसलिए मानी जाती है क्योंकि ब्रह्मवैवर्त पुराण में इस बारे में बताया गया है कि राधा और कृष्ण एक ही हैं और सृष्टि के आरंभ में केवल श्री कृष्ण थे। उन्होंने अपनी आनंदमयी शक्ति को खुद से अलग किया, जो उनके बाएं भाग से प्रकट हुईं और वही राधा रानी कहलाईं। इसी वजह से किसी भी पूजा में राधा रानी के साथ कृष्ण जी को जरूर शामिल किया जाता है।

अगर आप भी घर में लड्डू गोपाल की पूजा कर रहे हैं, तो आपको इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि इस दिन आपको राधा रानी के साथ श्री कृष्ण की भी पूजा करनी चाहिए। मुख्य रूप से आपको लड्डू गोपाल को भोग लगाना चाहिए और उनका विधि पूर्वक पूजन करना चाहिए।

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