त्रेता युग में भगवान परशुराम को क्यों लेना पड़ा अवतार? पढ़ें जन्म की अद्भुत कथा
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल तृतीया को परशुराम जयंती मनाई जाती है। भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम ने ...और पढ़ें

कब है परशुराम जयंती? (AI Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान परशुराम का अवतरण हुआ था। इसलिए हर वर्ष इस तिथि पर परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti 2026) मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम श्रीहरि विष्णु के छठे अवतार हैं।
परशुराम जी का अवतार उग्र माना गया है। देशभर में परशुराम जयंती को बेहद उत्साह के साथ मनाई जाती है। क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु ने क्यों लिया परशुराम का अवतार? अगर नहीं पता, तो आइए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।
क्यों अवतरित हुए परशुराम जी?
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में महिष्मती नाम का नगर था। इस नगर में राजा सहस्त्रबाहु का शासन था। राजा अधिक क्रूर और निर्दयी था। राजा प्रजा पर बेहद अत्याचार कर रहा था, जिससे नगरवासी राजा से परेशान हो गए थे। तब माता पृथ्वी भगवान विष्णु की शरण में पहुंचीं।
श्रीहरि को पहले ही इस बात की जानकारी थी कि माता पृथ्वी उनके पास क्यों आईं हैं। भगवान विष्णु ने माता पृथ्वी को आश्वासन दिया कि जल्द ही राजा सहस्त्रबाहु के अत्याचार का अंत होगा। उन्होंने माता पृथ्वी से कहा कि जब अधर्मी के द्वारा धर्म का पतन करने कोशिश की जाती है, तो तब मैं धर्म स्थापना के लिए जरूर अवतरित होता हूं।
साथ ही उन्होंने आगे कि मैं महर्षि जमदग्नि के घर पुत्र के रूप में अवतार लूंगा और सहस्त्रबाहु का वध करूंगा। कुछ समय के बाद भगवान विष्णु वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर परशुराम रूप में अवतरित हुए। इसके बाद भगवान परशुराम ने राजा सहस्त्रबाहु का वध किया और नगरवासियों को भय और आतंक से मुक्त किया। परशुराम जी के अवतार वर्णन विष्णु पुराण में है।
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(AI Generated Image)
कब है परशुराम जयंती 2026? (Parshuram Jayanti 2026 Date)
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 20 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर होगा। ऐसे में परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। इसी दिन अक्षय तृतीया भी है।
परशुराम जयंती के दिन करें ये काम
सनातन धर्म में परशुराम जयंती का विशेष महत्व है। परशुराम जयंती के दिन से ही त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना जरूर करनी चाहिए। साथ ही अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन कामों को करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और बिगड़े काम पूरे होते हैं। साथ ही जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं।
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