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Ramayana Story: रावण के दरबार में जब अंगद ने गाड़ा पैर, बड़े-बड़े सूरमाओं के क्यों छूट गए पसीने?

Published: Wed, 28 Jan 2026 10:06 AM (IST)

रामायण के इस प्रसंग में जानें कि कैसे अंगद ने रावण की भरी सभा में अपना पैर जमाकर लंका के ...और पढ़ें

Ramayana: कोई क्यों नहीं हिला पाया था अंगद का पैर?

Ramayana: कोई क्यों नहीं हिला पाया था अंगद का पैर?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण का वो दृश्य आज भी रोंगटे खड़े कर देता है जब बाली पुत्र अंगद लंका के राज दरबार में रावण के सामने अपना पैर जमाकर खड़े हो जाते हैं। रावण के एक से एक दिग्गज योद्धा, यहां तक कि उसका सबसे शक्तिशाली पुत्र इंद्रजीत (मेघनाद) भी उस पैर को हिला तक नहीं पाए।

अटूट आत्मविश्वास और प्रभु भक्ति

अंगद के पैर के न हिलने का सबसे बड़ा कारण उनका श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास था। अंगद जानते थे कि वे केवल एक दूत नहीं, बल्कि स्वयं साक्षात धर्म के प्रतिनिधि बनकर वहां खड़े हैं। जब कोई व्यक्ति सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग होता है, तो संसार की कोई भी आसुरी शक्ति उसे विचलित नहीं कर सकती। उनके पैर की मजबूती उनके संकल्प की दृढ़ता थी।

योगिक शक्ति और प्राणवायु का नियंत्रण

गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस के लंका कांड के अनुसार, वानर सेना के योद्धा योग और प्राणायाम में निपुण थे। अंगद ने अपने शरीर की समस्त प्राण ऊर्जा को अपने पैर के तलवों में केंद्रित कर दिया था। इसे 'स्तम्भन शक्ति' कहा जाता है, जिससे शरीर का एक हिस्सा जड़ की तरह पृथ्वी से जुड़ जाता है। जब तक अंगद स्वयं नहीं चाहते, उनकी अनुमति के बिना पृथ्वी का कोई भ बल उन्हें हिला नहीं सकता था।

अहंकार बनाम समर्पण

लंका के योद्धा अहंकार में भरे थे। वे अपनी शारीरिक शक्ति के बल पर पैर उठाने की कोशिश कर रहे थे। वास्तु और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहंकार व्यक्ति की ऊर्जा को बिखेर देता है, जबकि समर्पण उसे केंद्रित करता है। रावण के योद्धा जब पैर उठाने आए, तो उन्हें अंगद का पैर किसी पर्वत जैसा भारी महसूस हुआ क्योंकि अंगद के पीछे श्रीराम की शक्ति कार्य कर रही थी।

Angad

(Image Source: AI-Generated)

जब स्वयं आगे आया रावण

आखिर में जब कोई इस कार्य को नहीं कर सका, तो रावण खुद अंगद का पैर उठाने के लिए सिंहासन से उतरा। अंगद ने बड़ी ही चतुराई और विनम्रता से अपना पैर हटा लिया। अंगद ने रावण से कहा- "मेरे पैर पकड़ने से क्या होगा, अगर पकड़ना है तो मेरे प्रभु श्रीराम के चरण पकड़ो, वही तुम्हारा कल्याण करेंगे।" यह प्रसंग दर्शाता है कि अंगद का उद्देश्य अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि रावण के अहंकार को तोड़ना था।

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