विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बच्चे के मुंडन के बाद सिर पर क्यों बनाते हैं हल्दी का स्वास्तिक? दादी-नानी के इस नियम में छुपा है बड़ा राज

Published: Thu, 22 Oct 2026 04:00 PM (IST)

मुंडन संस्कार के बाद बच्चे के सिर पर हल्दी का स्वास्तिक बनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। ...और पढ़ें

मुंडन संस्कार के बाद सिर पर स्वास्तिक बनाने का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

मुंडन संस्कार के बाद सिर पर स्वास्तिक बनाने का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. हल्दी और स्वास्तिक शुभता के प्रतीक माने जाते हैं।

  2. यह चोट ठीक करने और ऊर्जा नियंत्रित करने में सहायक।

  3. स्वास्तिक चार पुरुषार्थों का प्रतीक, गुरु बृहस्पति से संबंध।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म से ही कई संस्कार आरंभ हो जाते हैं और ये मृत्योपरांत तक चलते हैं। इन्हीं संस्कारों में से एक है मुंडन संस्कार। यह बच्चों के लिए एक अत्यंत शुभ संस्कार माना जाता है। इस दौरान बच्चों के बालों को हटाया जाता है और इसे एक बड़ा संस्कार माना जाता है।

मान्यता है कि जन्म के समय बच्चे के सिर में जो बाल होते हैं उसमें काई अशुध्दियां होती हैं और इन्हें दूर करने के लिए ही मुंडन की प्रथा निभाई जाती है। आपने अक्सर देखा होगा कि बच्चों के मुंडन के बाद सिर पर हल्दी से स्वास्तिक बनाया जाता है और इसे मुंडन संस्कार की पूर्णता से जोड़ा जाता है।

आपके मन में भी यह सवाल जरूर आता है कि मुंडन के बाद सिर में हल्दी लगाने का क्या कारण हो सकता है? आइए आपको बताते हैं इस परंपरा से जुड़े कई रहस्यों के बारे में।

स्वास्तिक शुभता का प्रतीक

मुंडन संस्कार के बाद सिर में हल्दी का स्वास्तिक बनाने के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि हल्दी और स्वास्तिक दोनों को शुभता का प्रतीक माना जाता है। जब मुंडन के समय सिर के बाल हटाए जाते हैं तब कोई अशुध्दि न रहे, इसलिए हल्दी लगाई जाती है।

यह शुभता का प्रतीक होने के साथ औषधीय गुणों से भरपूर भी होती है और अगर मुंडन के समय सिर में किसी तरह की चोंट या खरोच लगती है तो उसे ठीक करने में मदद करती है।

इसके पीछे एक मान्यता यह भी है कि मस्तिष्क में एक ऐसा चक्र होता है जो मन को नियंत्रित करता है। बच्चे के मुंडन के बाद हल्दी का स्वास्तिक इसी चक्र की ऊर्जा को नियंत्रित करने में मदद करता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में स्वास्तिक का विशेष महत्व है। इसी वजह से यह चिह्न किसी भी शुभ काम की पूर्णता का प्रतीक होता है।

स्वास्तिक बच्चे के चार पुरुषार्थों का प्रतीक

स्वास्तिक का निशान बच्चे के चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे गुणों को बढ़ाने में मदद करता है। मुंडन के तुरंत बाद सिर में स्वास्तिक बनाना बच्चे के सभी पुरुषार्थों को नियंत्रित करता है। इससे आगे चलकर बच्चा बहुत जल्दी चीजों का ठीक तरीके से अनुसरण करता है।

इसके अलावा स्वास्तिक के सभी बिंदु बच्चे का दिमाग केंद्रित रखने में मदद करते हैं। स्वास्तिक चरों दिशाओं का प्रतिनिधित्व करता है और इससे बच्चे का दिमाग तेज रहता है।

हल्दी से स्वास्तिक बनाने का महत्व

हल्दी को गुरु बृहस्पति की सामग्री माना जाता है और इससे बच्चे के मन में सकारात्मक ऊर्जा का वास होने लगता है। हल्दी का इस्तेमाल किसी भी शुभ काम में किया जाता है और इससे गुरु की ऊर्जा नियंत्रित होती है। इससे गुरु बृहस्पति प्रसन्न होते हैं और बच्चा हमेशा ऊर्जावां बना रहता है।

सभी आध्यात्मिक कारणों के अलावा मुंडन के समय बच्चे के सभी बालों को पूरी तरह से काटा जाता है और उसके सिर में अगर कोई चोंट लगी हो, तो उसे ठीक करने के लिए हल्दी लगाई जाती है।

यह भी पढ़ें- स्वास्तिक के दोनों ओर क्यों खींची जाती हैं 2 सीधी रेखाएं? जानें इसका धार्मिक और आध्यात्मिक रहस्य

यह भी पढ़ें- क्या है स्वास्तिक और उसके साथ बनी 2-2 खड़ी रेखाओं का धार्मिक अर्थ?

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।