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क्या है मां छिन्नमस्ता के कटे सिर का रहस्य? पुराणों में छुपा है देवी के अद्भुत स्वरूप का अर्थ

Published: Thu, 13 Aug 2026 04:43 PM (IST)

क्या है मां छिन्नमस्ता के स्‍वरूप का रहस्य? जानें पुराणों और तंत्र शास्त्र में छिपा देवी के अद्भुत स्वरूप का अर्थ।

मां छिन्नमस्ता के कटे सिर का रहस्य जानें ।  (Picture Credit- AI Generated)

मां छिन्नमस्ता के कटे सिर का रहस्य जानें । (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. देवी छिन्नमस्ता का अद्भुत स्वरूप आत्मबलिदान का प्रतीक है।

  2. उनका कटा सिर जीवन-मृत्यु के चक्र को दर्शाता है।

  3. मंदाकिनी नदी में सहेलियों की भूख मिटाने को काटा सिर।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। बीते कुछ समय से सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो को लेकर बहस छिड़ी हुई है। वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल के नृत्य नाटिका का है, जिसमें दस महाविद्याओं को बहुत ही सुंदर अंदाज में कलाकारों ने पेश किया है। लेकिन कुछ लोगों को इस नाट्य में देवी छिन्नमस्ता माता की पोशाक से आपत्ति है।

हिंदू धर्म और शाक्‍त परंपरा में देवी शक्ति के दस तांत्रिक और दिव्‍य रूपों का महत्‍व बताया गया है। शास्‍त्रों में इस दस महाविद्याएं कहा गया है। इन दस देवियों में छठी महाविद्या छिन्‍नमस्‍ता माता हैं। देवी का यह स्‍वरूप बहुत ही अद्भुत है और लोगों को इस दिव्‍य रूप के बारे में बहुत कम जानकारी है। तो चलिए हम आपको आज बहस का मुद्दा बनी देवी छिन्‍नमस्‍ता माता के बारे में विस्‍तार से बताते हैं।

कौन हैं देवी छिन्‍नमस्‍ता माता?

धार्मिक ग्रंथों में देवी छिन्नमस्ता माता को प्रचंड चंडिका बताया गया है। इन्हें छिन्नमस्ता इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इनका सिर नहीं है। छिन्नमस्ता का अर्थ भी 'सिर को काट लेना' ही है। मां छिन्नमस्ता की जो तस्वीरें या मंदिरों में इनकी जो पौराणिक मूर्तियां हैं, उनके दर्शन करने पर जो छवि नजर आती है, उसमें देवी का सिर कटा हुआ है और धड़ से रक्त की तीन धाराएं नजर आ रही हैं। एक हाथ में देवी ने तलवार पकड़ी हुई है और दूसरे हाथ में अपना कटा हुआ सिर थामा है। रक्त की एक धार देवी की सखी जया और दूसरी विजया के मुंह में जा रही है, तो तीसरी धारा देवी के स्वयं के मुख में जा रही है। देवी छिन्‍नमस्‍ता देवी शक्ति का ही एक स्‍वरूप हैं। देवी का यह स्‍वरूप आत्‍मबलिदान का प्रतीक है। साथ ही, माता के इस स्वरूप को मृत्यु का प्रतीक भी कहा जाता है। छिन्नमस्ता माता को कामदेव और रति के ऊपर खड़ा हुआ दिखाया जाता है, जो संभोग की अवस्था में पाए जाते हैं।इसका सीधा अर्थ है कि संभोग नई जिंदगी को जन्‍म देता है। इस तरह से देवी के इस स्‍वरूप के माध्‍यम से समझा जा सकता है कि जीवन और मृत्‍यु एक ही सिक्‍के के दो पहलू हैं। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि सृजन ओर विनाश हमेशा एक साथ ही चलते हैं।

क्‍या है देवी छिन्‍नमस्‍ता के सिर काटने के पीछे की कथा?

देवी छिन्नमस्ता के स्वरूप का मुख्य वर्णन शाक्त ग्रंथों जैसे प्राणतोषिनी तंत्र और नारद-पंचरात्र में विस्तार से मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार देवी पार्वती एक दिन अपनी दो सहेलियों के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान कर रही थीं। स्नान करते-करते दोनों सहेलियों को तेज भूख लगी। जब यह बात उन्होंने देवी पार्वती को बताई, मगर दोनों की बातों पर देवी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।इस पर नाराज होकर दोनों सहेलियों ने कहा, 'तुम्हें तो पूरा जग देवी मानता है, अपनी मां समझता है और मां तो बच्चों को भूखा देखकर अपना खून तक बहा देती है, तुम तो हमारी बातों पर ध्यान भी नहीं दे रही हो।'

सहेलियों की इस बात पर देवी पार्वती को क्रोध आ गया और उन्होंने खड्ग से अपना सिर काट लिया। सिर से खून की धाराएं निकलने लगीं, तो देवी पार्वती ने सहेलियों को कहा कि मेरे रक्त से अपनी भूख मिटा लो। बस तब से देवी के इस स्वरूप को छिन्नमस्ता माता कहा जाने लगा।

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