शादी में आ रही रुकावट का कारण आपकी कुंडली में मौजूद 'पितृ दोष' तो नहीं है? ऐसे करें तुरंत पहचान!
शादी में बार-बार आ रही रुकावटों का एक कारण कुंडली में मौजूद पितृ दोष हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार, ...और पढ़ें

पितृ दोष के कारण शादी में आ रही बाधाएं? ऐसे पहचानें (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
शादी में रुकावट का कारण हो सकता है पितृ दोष।
कुंडली में राहु-केतु के प्रभाव से बनता है पितृ दोष।
श्राद्ध और दान से पितृ दोष के प्रभाव को करें दूर।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कई बार आपकी हजार कोशिशों के बाद भी शादी का रिश्ता ढूढ़ने में समस्याएं आती हैं। शादी की बात आगे बढ़ने के बाद भी रिश्ता नहीं जुड़ पाता है। इसका एक बड़ा कारण आपकी कुंडली में मौजूद पितृ दोष हो सकता है।
पितृ दोष व्यक्ति के जीवन में, मुख्य रूप से शादी और पारिवारिक जीवन से जुड़े मामलों में, कई तरह की रुकावटें पैदा करने वाला हो सकता है। जिन लोगों की शादी में बार-बार अड़चनें आती हैं, उनकी कुंडली में यह दोष हो सकता है।
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिष चंद्रेश शर्मा बताते हैं कि शादी में बार-बार आने वाली रुकावटों का एक कारण पितृ दोष हो सकता है और इसे पहचानकर इसे कुछ आसान उपायों से दूर किया जा सकता है। आइए जानें कुछ संकेतों और उनके उपायों के बारे में।
कुंडली में पितृ दोष और विवाह में देरी के कारण
जब कुंडली में राहु या केतु का संबंध सूर्य, चंद्रमा या नवम भाव जिसे भाग्य व धर्म का भाव कहा जाता है उससे बनता है या नवम भाव का स्वामी पीड़ित होता है, तो पितृ दोष का निर्माण होता है।
पितृ दोष की वजह से जीवन में कई समस्याएं आ सकती हैं जैसे घर में लड़ाई-झगड़ों का बढ़ना, आर्थिक स्थिति का खराब होना और सबसे बड़ी बात आपके शादी में बाधाएं आना। कई बार पितृ दोष की वजह से ही आपकी शादी की बात बनते-बनते भी बिगड़ जाती है।
पितृ दोष किसी भी काम को बनते-बनते बिगाड़ सकता है। इसी वजह से शादी में बाधाओं का एक कारण पितृ दोष भी हो सकता है।
पितृ दोष का विवाह भाव पर प्रभाव
अगर आपकी कुंडली में सप्तम भाव में किसी भी तरह का दोष होता है, तो इसकी वजह से विवाह में देरी हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुंडली के सप्तम भाव को विवाह का स्थान माना जाता है।
यदि कुंडली के सप्तम भाव, सप्तम भाव के स्वामी या विवाह के कारक ग्रह गुरु व शुक्र पर राहु-केतु या शनि का अशुभ प्रभाव हो और इसके साथ ही कुंडली में पितृ दोष भी विद्यमान हो, तो विवाह में बार-बार बाधाएं आ सकती हैं और रिश्ते भी बनते-बनते टूटने लगते हैं। यही नहीं इसकी वजह से सही जीवनसाथी मिलने में भी देरी होती है।
पितृ दोष शांति और विवाह बाधा दूर करने के उपाय
अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष के संकेत मौजूद हैं, तो आपको कुछ आसान उपाय आजमाने चाहिए जिससे पितृ दोष को पूरी तरह से दूर किया जा सके।
इसके लिए आप एक विशेष अनुष्ठान त्रिपुंडी श्राद्ध कर सकते हैं या फिर नारायण बलि और नाग बलि श्राद्ध किया जा सकता है। इससे पितृ दोष को दूर करने में मदद मिलती है और विवाह में आने वाली बाधाएं भी दूर हो सकती हैं।
नियमित अर्पण व दान करें
अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष मौजूद है तो आपके लिए यह सलाह दी जाती है कि आप नियमित रूप से पितरों के नाम से जल अर्पित करें और मुख्य रूप से अमावस्या तिथि पर दान करें।
अगर आप ज्यादा समय नहीं निकाल पा रहे हैं, तो आपको हर अमावस्या तिथि में पूर्वजों के नाम से भोजन या अनाज का दान करना चाहिए। यही नहीं अगर आप ब्राह्मण को या मंदिर में दान करेंगे, तो यह भी आपके लिए फलदायी हो सकता है।
अगर आपकी शादी में भी बार-बार बाधाएं आ रही हैं और रिश्ता बनते-बनते टूट जाता है, तो आप यहां बताए तरीकों से पितृ दोष की पहचान कर सकते हैं और कुछ आसान उपाय से इस समस्या का समाधान पा सकते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
