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Mahashivratri 2026: साल में 12 शिवरात्रि और 1 महाशिवरात्रि! क्या है इनके पीछे का अलग-अलग फल?

Published: Mon, 09 Feb 2026 11:08 AM (GMT+05:30)

मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है, जो व्यक्तिगत शुद्धि, इंद्रियों पर विजय और गृहस्थ ...और पढ़ें

Mahashivratri 2026: शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का महत्व। (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Mahashivratri 2026: भगवान शिव के भक्तों के लिए 'शिवरात्रि' का दिन बहुत महत्व रखता है। अक्सर लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज्ड रहते हैं कि हर महीने आने वाली शिवरात्रि और साल में एक बार आने वाली महाशिवरात्रि में क्या अंतर है। इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इन दोनों के बीच क्या अंतर है और इनका क्या महत्व व फल है?

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मासिक शिवरात्रि हर महीने का कठिन नियम

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस तरह एक साल में कुल 12 मासिक शिवरात्रि आती हैं। माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत इंद्रियों पर विजय पाने और मन को स्थिर करने में मदद करता है। यह शिव और शक्ति के मिलन की मासिक याद दिलाता है। जो जातक नियमित रूप से हर महीने की शिवरात्रि का व्रत रखते हैं, उनके जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही रोगों से मुक्ति और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।

महाशिवरात्रि महान मिलन की रात

फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहा जाता है। यह सभी शिवरात्रि में सबसे महत्वपूर्ण मानी गई है। महाशिवरात्रि को लेकर तीन प्रमुख मान्यताएं हैं -
1. शिव-पार्वती विवाह: इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, जो वैराग्य और गृहस्थ जीवन के मिलन का प्रतीक है।
2. ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य: इसी रात्रि को भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।
3. तांडव नृत्य: यह भी कहा है कि इसी रात महादेव ने सृजन और विनाश का 'महातांडव' किया था।

दोनों के बीच अंतर

  • मासिक शिवरात्रि व्यक्तिगत शुद्धि का माध्यम है, जबकि महाशिवरात्रि ब्रह्मांडीय ऊर्जा को पाने का दिन है।
  • मासिक शिवरात्रि का व्रत गृहस्थ सुखों के लिए किया जाता है, जबकि महाशिवरात्रि का व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष के लिए किया जाता है।
  • महाशिवरात्रि को सिद्धि की रात भी कहा जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।