Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा पर करें ये भव्य आरती, मिलेगा सुख-शांति का वरदान
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima 2026) हिंदू धर्म में बहुत पवित्र मानी जाती है। यह आज यानी 1 फरवरी 2026 को ...और पढ़ें

Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा की आरती।
HighLights
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है
माघ पूर्णिमा को धार्मिक दृष्टि से सबसे पावन माना गया है
माघ माह की पूर्णिमा पर पूजा-पाठ का बड़ा महत्व है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन माघ पूर्णिमा को धार्मिक दृष्टि से सबसे पावन माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, माघ माह की पूर्णिमा पर पूजा-पाठ और व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। साल 2026 में माघ पूर्णिमा का यह पावन पर्व 1 फरवरी 2026 यानी आज के दिन मनाया जा रहा है।
इस दिन (Magh Purnima 2026) स्नान-दान के साथ-साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करने से साधक को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-शांति का वरदान मिलता है, तो आइए आरती करते हैं।

।।भगवान विष्णु की आरती।।
ॐ जय जगदीश हरे आरती
ॐ जय जगदीश हरे...
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे...
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे...
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे...
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे...
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे...
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे...
॥आरती श्री लक्ष्मी जी॥
ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता,मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते,वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर,क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता,पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
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