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शिवलिंग पर शंख से जल क्यों नहीं चढ़ाते? शंखचूड़ के वध से जुड़ी है इसकी कथा 

Published: Mon, 06 Jul 2026 08:56 AM (GMT+05:30)

सनातन धर्म में शंख को पूजा-पाठ में शुभ माना जाता है, लेकिन शिवलिंग पर इससे जल अर्पित नहीं किया जाता ...और पढ़ें

शिवलिंग पर शंख से जल क्यों नहीं? (Picture Credit: AI Generated)

शिवलिंग पर शंख से जल क्यों नहीं? (Picture Credit: AI Generated) 

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में शंख को पूजा-पाठ में शामिल किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय निकले चौदह रत्नों में से हुई थी। इसे पूजा-पाठ या मांगलिक कामों में बजाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि शंख को बजाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और वातावरण शुद्ध होता है।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु पर शंख के द्वारा जल अर्पित किया जाता है, लेकिन भगवान शिव पर शंख से जल अर्पित करने की मनाही है। क्या आप जानते हैं कि आखिर शिवलिंग का अभिषेक शंख से क्यों नहीं किया जाता। अगर नहीं पता, तो ऐसे में चलिए आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में।

महादेव ने किया शंखचूड़ का वध

पौराणिक कथा के अनुसार, एक दैत्यराज नामक दैत्य था। उसकी कोई संतान नहीं थी। उसने संतान की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु की तपस्या की। इसके बाद उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर प्रभु ने उससे वरदान मांगने को कहा। दैत्य ने एक ऐसे पुत्र का वरदान मांगा, जिसका तीनों लोकों पर अधिकार हो।

प्रभु ने उसके वरदान को स्वीकार किया। वरदान से उसको एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम शंखचूड़ था। इसके बाद उसने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था, जिसकी वजह से देवता परेशान हो गए। इसके बाद सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे।

देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने शंखचूड़ के साथ युद्ध किया और त्रिशूल की मदद से उसका वध किया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शंखचूड़ की हड्डियों से शंख की उत्पत्ति हुई थी। इसी वजह से शंख को शंखचूड़ का प्रतीक माना जाता है और शंख के द्वारा महादेव पर जल चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए शंख से महादेव पर जल चढ़ाने की मनाही है। शिवलिंग पर शंख से जल न चढ़ाने का वर्णन शिवपुराण के रुद्र संहिता में मिलता है।

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  • सनातन धर्म में पूजा के दौरान शंख बजाने का अधिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि पूजा में शंख को शामिल न करने पूजा सफल नहीं होती है।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार, शंख बजाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और इसकी ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है।

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  • आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शंख को समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में एक माना जाता है। इसलिए शंख भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को प्रिय है।
  • इसके अलावा पूजा-पाठ के दौरान शंख बजाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और वास्तु दोष की समस्या से छुटकारा मिलता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।