ललिता से लेकर विशाखा तक, ये थीं राधा रानी की 8 सबसे प्रिय सहेलियां, जानिए अष्टसखी बारे में सबकुछ
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में राधा रानी की अष्टसखी का महत्वपूर्ण स्थान था, जो गोलोक से उनके साथ आई थीं। ...और पढ़ें

गोलोक से क्यों आईं अष्टसखी? (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण ने बचपन में कई दिव्य लीलाएं की हैं, जिन्हें आज के समय में भी लोग सुनते और सुनाते हैं। कान्हा जी की ऐसी कई लीलाएं हैं, जो राधा रानी से जुडी हैं। पद्म पुराण में बताया गया है कि जब भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने द्वापर युग में अवतार लिया, तो उनके साथ लीलाएं करने के लिए गोलोक से उनकी सहेलियां भी आईं, जिन्हें अष्टसखी के नाम से जाना जाता है।
क्या आप जानते हैं कि कौन थीं अष्टसखी और उनका राधा रानी से क्या संबंध था। अगर नहीं जानते, तो चलिए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं कि इसके बारे में।

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1. ललिता सखी- राधा रानी की ललिता सखी को सभी सखियों में प्रमुख माना जाता है। ललिता सखी का स्वभाव चंचल माना गया है। ललिता सखी हमेशा राधा रानी की तरफ रहती थीं।
2. विशाखा सखी- बुद्धिमानी और कलात्मक प्रतिभा के लिए विशाखा सखी मशहूर थीं। विशाखा सखी का काम राधा और कृष्ण के बीच संदेशवाहक का होता था।
3. चंपकलता सखी- यह स्वादिष्ट भोजन बनाने के लिए अधिक मशहूर थीं। इनका स्वभाव बेहद स्नेहमय और कोमल था। वे हमेशा राधा-कृष्ण की लीलाओं में साथ रहती थीं। साथ उनकी जरूरतों का ध्यान रखती थीं।
4. चित्रा सखी- चित्रा सखी कविता, संगीत और चित्रकला के लिए मशहूर थीं। वे श्री कृष्ण के मन के भावों को सुंदर-सुंदर चित्र बनाती थीं। चित्रा सखी भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के लिए खेलों का आयोजन किया करती थीं।
5. तुंगविद्या सखी- ये सखी बुद्धिमत्ता और कला के लिए निपुण थीं। ये सखी भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के लिए सुंदर भजनों का गायन किया करती थीं, जिससे प्रभु और राधा रानी प्रसन्न होती थीं। इन्हें चारों वेदों और कलाओं का पूर्ण ज्ञान था।
6. इन्दुलेखा देवी- ये सखी पीली साड़ी पहनती थीं और जीवन में सदैव मुस्कुराती रहती थीं। वे स्वभाव से थोड़ी से चतुर थीं। इन्दुलेखा सखी की मधुर वाणी से माहौल आनंदमय हो जाता था। वे हंसी मजाक करने में सबसे आगे रहती थीं। इसके अलावा ये सखी राधा-कृष्ण के गुप्त संदेशों को एक-दूसरे तक पहुंचाती थीं।
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7. रंगदेवी सखी- इस सखी का स्वभाव हंसमुख और चंचल था। रंगदेवी सखी इत्र और चंदन तैयार करने में निपुण थीं। जब भगवान श्रीकृष्ण लीलाओं को करने के बाद थक जाते थे, तो रंगदेवी सखी प्रभु के चरणों में चंदन लगाती थीं।
8. सुदेवी सखी-ये हमेशा निस्वार्थ सेवा के लिए मशहूर थीं। इस सखी का स्वभाव सीधा था। इस सखी का काम भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के लिए जल और पुष्प अर्पित करना था।
इन 8 सहेलियों का रिश्ता राधा रानी से आध्यात्मिक और निस्वार्थ प्रेम का था। राधा रानी की अष्टसखी का वर्णन पद्म पुराण के पाताल खंड में मिलता है।
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