हर व्यक्ति का जन्म किसी न किसी विशेष लग्न में होता है। इससे पहले हमने अपने आपको तुला लग्न के जातकों के बारे में बताया थ। वहीं, आज हम आपको कर्क लग्न में जन्मे लोगों की विशेषता बता रहे हैं। ज्योतिषाचार्य दयानंद शास्त्री जी के अनुसार, कर्क लग्न भावुकता प्रधान होता है। साथ ही इस लग्न के जातक बेहद परिश्रमी होते हैं लेकिन इन्हें फल देर से मिलता है। तो चलिए जानते हैं कर्क लग्न के जातकों का व्यक्तित्व और विशेषताएं:

कर्क लग्न की विशेषता:

कुछ ऐसा होता है स्वाभाव: अगर व्यक्ति की कुंडली के पहले भाव में 4 अंक लिखा है तो वह कर्क लग्न का होता है। ये सामाजिक और कला के क्षेत्र में सक्रिय होते हैं। इसके लिए लग्नेश चंद्रमा, पंचमेश मंगल और भाग्येश बृहस्पति अति शुभ माने जाते हैं। इनकी दशा-महादशाएँ अति लाभकारी होती हैं। अशुभ ग्रहों की बात करें तो इनके लिए ये बुध, शुक्र व शनि हैं। शनि सप्तमेश होकर मारकेश हो जाता है। अत: इसकी दशा-महादशा, साढ़ेसाती बेहद अशुभ हो सकती है। इससे निजात पाने के लिए धर्म और न्याय के रास्ते पर चलें।

इस लग्न के लिए तटस्थ रहता है। इस राशि में जन्मे जातक राजनेता, मंत्री, राज्याधिकारी, डाक्टर, व्यवसायी, नाविक, प्राध्यापक अथवा इतिहासकार आदि क्षेत्रों में सफलता हासिल करते हैं। साथ ही इनके ज्यादातर मित्र वृश्चिक, मकर एवं मीन लग्न वाले होते हैं। ये बेहद न्याय प्रिय होते हैं। साथ ही इनकी मानसिक शक्ति बड़ी तीव्र होती है। साथ ही मजबूत भी होती है। ये विलासी, गतिशील, परिवर्तनशील एवं चंचल प्रवृत्ति के होते हैं। साथ ही भावुकता भी इनमें प्रधान रूप से होती है। ये इतने भावुक हो जाते हैं कि इन्हें भला-बुरा तक नहीं सूझता है। यात्रा करना भी इन्हें बेहद पसंद होता है।

ऐसी होती है कद-काठी:

ग्रहों की स्थिति के कारण इनका रंग श्याम वर्ण हो सकता है। मंझोला कद और सुगठित शरीर होता है। इनके दांत बड़े आकार के होते हैं। नैन-नक्श सुंदर होते हैं।

कर्क लग्न के लिए क्या होता है शुभ:

इनके लिए पुखराज, मूंगा पहनना फायदेमंद हो सकता है। दिनों की बात करें तो सोमवार, मंगलवार व गुरुवार लाभदायक हो सकता है। वहीं, सफेद, पीला व लाल रंग भी इस राशि के जातकों के लिए शुभ है।

जानें अन्य विशेषताएं:

इस लग्न के जातक समाज में बेहद लोकप्रिय होता है। ये कोई भी प्रोग्राम अचानक से बना लेते हैं। साथ ही इन्हें अपना घर एकदम सुसज्जित पसंद हो। इनके मन में कई मकानों की इच्छा होती है। भगवान राम की कुंडली भी कर्क लग्न की थी। देखा गया है कि इस लग्न के जातक की चाल एक-सी नहीं रहती है। ग्रहों के मुताबिक, कभी कर्क लग्न का पुरुष जातक अपनी पत्नी से प्रेम करने वाला उसकी बात का पालन करने वाला होता है. देखा गया है कि इस लग्न में जन्मे जातक की चाल सामान्य नहीं होती है. ग्रहों की गति के अनुचाल सामान्य तो कभी तेज हो जाती है। इनके दिमाग में हमेशा कुछ न कुछ चलता ही रहता है।

इस लग्न का तत्व जल है। ऐसे में दूसरों का दुख देखकर आप पिघल सकते हैं। छोटी से छोटी बात भी आपको बेचैन कर सकती है। ऐसे में किसी भी निर्णय को लेने से पहले आपको विचार अवश्य कर लेना चाहिए। वहीं, अगर आप किसी बात पर अड़ गए हैं तो आप उसे नहीं छोड़ेंगे। आप मित्रों के लिए अच्छे मित्र हैं लेकिन शत्रुओं से शत्रुता भी वैसे ही निभाते हैं। आप अपने शत्रुओं को कभी नहीं भूलते हैं।

 

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