Lalita Panchami 2026: आज नवरात्र की पंचमी तिथि पर देवी ललिता की पूजा से मिलेगा ज्ञान और समृद्धि का वरदान
शारदीय नवरात्र के दौरान आने वाली ललिता पंचमी 15 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी, जो देवी ललिता को समर्पित है ...और पढ़ें

ललिता पंचमी 2026 तिथि

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र के दौरान आने वाली ललिता पंचमी का त्योहार इस साल 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन यानी आज है। यह पवित्र दिन देवी ललिता को समर्पित है, जिन्हें त्रिपुरा सुंदरी और षोडशी के नाम से भी जाना जाता है। यह शक्ति पूजा, उपवास, ज्ञान, शक्ति, सुंदरता और समृद्धि को प्राप्त करने का दिन है। हिंदू पौराणिक कथाओं में देवी ललिता 10 महाविद्याओं में शामिल है।
ललिता पंचमी को उपांग ललिता व्रत के नाम से भी जाना जाता है, जो मुख्य रूप से गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। नवरात्र के विपरित जिसमें दुर्गा मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ललिता पंचमी भक्तों को देवी ललिता की पूजा करने का एक अनोखा मौका प्रदान करता है।
ललिता पंचमी 2026 तिथि और समय
इस साल ललिता पंचमी का व्रत 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
पंचमी तिथि प्रारंभ- 15 अक्टूबर 2026 को रात 1 बजकर 13 मिनट पर
पंचमी तिथि समाप्त- 16 अक्टूबर 2026 को रात 3 बजकर 25 मिनट पर
ललिता देवी कौन हैं?
ललिता देवी को त्रिपुरा सुंदरी और षोडशी के नाम से भी जाना जाता है। शाक्त परंपरा में उन्हें एक महत्वपूर्ण देवी और प्रकृति की परम शक्ति के रूप में पूजा जाता है। वे 10 महा विद्याओं में से एक हैं, जो दिव्य ज्ञान और शक्ति के अलग-अलग रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
ललिता पंचमी भक्तों को देवी मां की प्रार्थना करने और उनके गुणों जैसे विवेक, आध्यात्मिक ज्ञान और साहस को प्राप्त करने का मौका प्रदान करती है। यह पर्व खासतौर से गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में मनाया जाता है, जहां व्रत कती अपनी-अपनी परंपराएं हैं।
ललिता देवी की पूजा विधि
स्कंद पुराण के मुताबिक, उपांग ललिता व्रत अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर पड़ता है। श्रद्धालु स्नान और दैनिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धापूर्वक भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं।
व्रत के दौरान अपामार्ग पेड़ों की पूजा की जाती है और दीर्घायु, शक्ति, ज्ञान और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा जाता है। प्रथाएं क्षेत्रानुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
अपामार्ग पौधे की प्रार्थना का महत्व
उपांग ललिता व्रत से जुड़ी पारंपरिक प्रार्थना में अपामार्ग जड़ी बूटी से कई वरदानों की प्रार्थना की जाती है। संस्कृत में रचित यह भजन 'आयुर्बलम यशो वर्च' पंक्ति से शुरू होता है और इसमें दीर्घायु, शक्ति, यश, संतान, धन, विवेक और स्मृति के लिए कामना की जाती है। प्रार्थना का मूल विषय शारीरिक सुख को मानसिक और आध्यात्मिक प्रगति से जोड़ना है। इसमें प्रज्ञा (ज्ञान और विवेक) तथा मेधा (बुद्धि और अच्छी स्मृति) के लिए भी प्रार्थना की जाती है।
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