भगवान विष्णु जहां करते हैं विश्राम, वो कैसे बना क्षीर सागर? पढ़ें कामधेनु गाय के प्राकट्य की कथा
क्षीर सागर, जिसे भगवान विष्णु का निवास स्थान माना जाता है, की उत्पत्ति एक पौराणिक कथा से जुड़ी है। यह ...और पढ़ें
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क्षीर सरोवर का धार्मिक महत्व (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म ग्रंथों में क्षीर सागर को भगवान विष्णु के निवास स्थान के रूप में वर्णन किया गया है। क्षीर सागर को दूध का सागर भी कहा जाता है। विष्णु पुराण और भागवत पुराण में बताया गया है कि ब्रह्मांड में स्थित सात प्रमुख महासागरों में से क्षीर सागर एक है। इसे अनंत ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
क्षीर सरोवर की उत्पत्ति की कथा भगवान श्रीकृष्ण के परम धाम गोलोक से संबंधित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, क्षीर सरोवर में भगवान विष्णु शेषनाग पर योगनिद्रा में विश्राम करते हैं। क्या है आप जानते हैं कैसे हुई क्षीर सरोवर की उत्पत्ति। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए आपको बताते हैं इसकी वजह के बारे में।

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कैसे हुई क्षीर सरोवर की उत्पत्ति
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार का समय था जब भगवान श्रीकृष्ण श्रीराधा और अन्य गोपियों वृंदावन में भ्रमण कर रहे थे। उस समय भगवान श्रीकृष्ण को दूध पीने का मन किया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए लीला के तहत अपने शरीर के बाएं हिस्से से एक तेजस्विनी गाय को प्रकट किया, जिसे माता सुरभि और कामधेनु गाय के नाम से जाना जाता है। कामधेनु गाय के साथ एक बछड़ा भी प्रकट हुआ, जिसका नाम मनोरथ था।
इसके बाद श्रीकृष्ण के ग्वाल-बाल ने बर्तन में माता सुरभि का दूध निकाला। दूध अमृत के समान मीठा था। श्रीकृष्ण ने कामधेनु गाय का दूध पिया। इसके बाद श्रीकृष्ण हाथ से दूध का बर्तन छूटकर धरती पर गिर गया। सारा दूध गोलोक की भूमि पर फैल गया। दूध ने अत्यंत विशाल क्षेत्र का रूप ले लिया। दूध से बना इसी महासरोवर को क्षीर सरोवर के नाम से जाना गया। इसी तरह से क्षीर सरोवर की उत्पति हुई।
यह क्षीर सरोवर राधा रानी और गोपियों के खेलने के काम आने लगा। भगवान श्रीकृष्ण की इच्छा से माता सुरभि से बहुत सारी गाएं और बछड़े पैदा हुए।
गौ-पूजा की शुरुआत का महत्व
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने सर्वप्रथम माता सुरभि की विशेष पूजा-अर्चना की। इसी के बाद तीनों लोकों में गौ-माता की पूजा-अर्चना करने की परंपरा की शुरुआत हुई। इसलिए हिंदू धर्म में गाय को ब्रह्मांड की माता माना जाता है, जिसके भीतर सभी देवी-देवताओं का वास होता है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खण्ड और श्रीकृष्ण जन्म खण्ड में क्षीरसरोवर की उत्पत्ति का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसके अलावा देवी भागवत पुराण के नवम स्कन्ध में भी सुरभि गाय के प्रकट होने का वर्णन देखने को मिलता है।
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