ब्रह्मा जी ने किया आह्वन

कहते हैं एक बार जब सम्पूर्ण जगत् जलमग्न था और भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में थे, उसी समय उनके कानों के मैल से मधु और कैटभ नाम के दो भयंकर असुर उत्पन्न हुए। वे दोनों ब्रह्माजी का वध करने को तैयार हो गये। भगवान विष्णु के नाभिकमल में विराजमान प्रजापति ब्रह्माजी ने जब उन दोनों असुरों को अपने पास आया और भगवान को सोया हुआ देखा, तब उन्होंने भगवान विष्णु को जगाने के लिये उनके नेत्रों में निवास करनेवाली योगनिद्रा का स्तवन आरम्भ किया। 
प्रकट हुईं महाकाली
महाकाली को इस विश्व की अधीश्वरी, जगत् को धारण करनेवाली, संसार का पालन और संहार करने वाली तथा तेज:स्वरूप भगवान विष्णु की अनुपम शक्ति माना जाता है। जब ब्रह्मा जी उन्हीं भगवती निद्रादेवी की स्तुति करने लगे। तो देवी महामाया यानि महाकाली अवतरित हुईं। ब्रह्माजी द्वारा स्तवित महाकाली अपने दस हाथों में खड्ग, चक्र, गदा, बाण, धनुष, परिघ, शूल, भुशुण्डि, मस्तक और शंख धारण करती हैं। इनके समस्त अंग दिव्य आभूषणों से विभूषित हैं।
 

By Molly Seth