करुंगली माला पहन तो ली, पर क्या सही नियम पता हैं? ये छोटी-सी भूल छीन सकती है इसका असर!
करुंगली माला काले रंग की लकड़ी से बनी एक पवित्र माला है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा और नकारात्मकता से बचाव के ...और पढ़ें

करुंगाली माला का आध्यात्मिक महत्व

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हम से अधिकतर लोग अलग-अलग रत्नों की माला जरूर पहनते होंगे। लेकिन एक माला ऐसी भी है, जो दक्षिण भारत में, खासतौर पर तमिलनाडु और उसके आसपास के दक्षिणी राज्यों में काफी पहनी जाती है।
इसका नाम है 'कंरुगली माला'। काले रंग की लकड़ी के मोतियों से बनी एक पवित्र माला जिसे लेकर मान्यता है कि इसमें गहन आध्यात्मिक ऊर्जा समाहित है, जो इससे पहनने वाले की नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करती है। दक्षिण भारत के साथ-साथ उत्तर भारत में भी करुंगली माला अपने सुरक्षात्मक गुण के लिए प्रसिद्ध हो रही है।
करुंगली माला क्या है?
करुंगली माला काले रंग की लकड़ी से बनी मोतियों की माला है। इसके मोती करुणगली वृक्ष के बीच वाले हिस्से से लिए जाते हैं। इसका पेड़ धीरे-धीरे बढ़ता है, जिसकी लकड़ी मजबूत होने के साथ शुद्ध और हिंदू एवं बौद्ध धर्म की अनेक आध्यात्मिक मान्यताओं में पूजनीय मानी जाती है।
करुंगली माला का इस्तेमाल सदियों से साधु-संत, योग साधक और मंदिर के पुजारी प्रार्थना करते समय, जप और ध्यान के लिए करते थे। लोगों का मानना था कि यह लकड़ी अपने अंदर अच्छी ऊर्जा को धारण कर सकती है और आस पास की बुरी ऊर्जा को सोख लेती है। भारत के तमिलनाडु में यह माला भगवान मुरुगन से जुड़ी मानी जाती है।
करुंगली माला से जुड़े नियम
पहली बार करुंगली माला पहनते समय कुछ खास नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इस माला को नहाने से पहले, रात को सोने से पहले और अंतरंगता के दौरान नहीं पहनना चाहिए।
इसके अलावा मांसाहारी, शराब पीते या तामसिक भोजन करते हुए भी इसे धारण नहीं करना चाहिए।
कई लोगों का मानना है कि, अंतिम संस्कार में जाते समय भी इसे नहीं पहनना चाहिए। कुछ परिवारों में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान करुंगली माला को पहनने की सलाह नहीं दी जाती है।
लोगों का मानना है कि इन नियमों का पालन करने से वे माला के प्रति आध्यात्मिक सम्मान दिखा पाते हैं, जो इसे स्वच्छ और शांतिपूर्ण ऊर्जा प्रदान करने का काम करती है।
जब करुंगली माला न पहनें, तो उसे एक साफ कपड़े में लपेटकर रखना चाहिए। अधिकतर लोग इसे घर के पूजा स्थल या भगवान की मूर्ति के पास रखना पसंद करते हैं ताकि माला के प्रति सम्मान की भावना व्यक्त की जा सके।
करुंगली माला को कभी भी दूसरों के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने के पीछे लोगों का मानना है कि इससे व्यक्ति की ऊर्जा और भावना पर नकारात्मक असर पड़ता है।
करुंगली माला कौन पहन सकता है और कौन नहीं?
सबसे पहले तो करुंगली माला हर कोई पहन सकता है, क्योंकि यह माला उम्र, जाति, लिंग की सीमाओं से परे है। इसे अधिकतर लोग आध्यात्मिक ज्ञान और मन की शांति के लिए धारण करते हैं। पुरुष और महिला दोनों ही इसे पहन सकते हैं।
इसके अलावा 6 साल से ज्यादा उम्र के बच्चे भी इसे धारण कर सकते हैं। बच्चों के लिए यह माला प्रार्थना में मदद के लिए और पढ़ाई के दौरान बेहतर एकाग्रता प्रदान करने के लिए पहनी जाती है।
करुंगली माला को किसे नहीं पहनना चाहिए?
गर्भवती महिलाओं को करुंगली माला पहनने की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि आबनूस की लकड़ी के मनके स्वाभाविक रूप से भारी होते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान शरीर को हल्का और मुक्त एहसास कराना बेहद जरूरी है।
कुछ बुजुर्ग अंतिम संस्कार में जाते वक्त, अंतरंगता के दौरान, नहाते समय और सोते समय इसे पहनने से बचना चाहिए।
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