कजरी तीज व्रत से मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद, यहां पढ़ें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा
कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को मनाया जा रहा है, जिसमें सुहागिनें पति की लंबी उम्र और कुंवारी कन्याएं ...और पढ़ें
-1788081371857_m.webp)
काजरी तीज पर कैसे करें पूजा? (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
कजरी तीज 31 अगस्त को, पति की लंबी उम्र के लिए।
भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा।
शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा का महत्व।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 31 अगस्त को कजरी तीज (Kajri Teej 2026) का व्रत किया जा रहा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं।
कजरी तीज को सातूड़ी तीज भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कजरी तीज का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा के बारे में।
कजरी तीज 2026 डेट
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 31 अगस्त को कजरी तीज का व्रत किया जा रहा है।
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 09 मिनट से 05 बजकर 53 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 42 मिनट से 01 बजकर 34 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 03 बजकर 19 मिनट से 04 बजकर 11 मिनट तक
अमृत काल- दोपहर 03 बजकर 31 मिनट से 05 बजकर 06 मिनट तक
सूर्योदय का समय- प्रातः 05 बजकर 58 मिनट
सूर्यास्त का समय- सायं 06 बजकर 44 मिनट
चंद्रोदय का समय- रात्रि 08 बजकर 29 मिनट
चंद्रास्त का समय- प्रातः 08 बजकर 43 मिनट (1 सितंबर)
कजरी तीज पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
- चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- गोबर से भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता की प्रतिमा बनाएं।
- इसके बाद चौकी पर सभी मूर्तियों को स्थापित करें।
- अब शिव जी, मां पार्वती और नीमड़ी माता को जल, कच्चा दूध और पंचामृत से स्नान कराएं।
- माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
- महादेव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल चढ़ाएं और नीमड़ी माता को जल व रोली अर्पित करें।
- देसी घी का दीपक जलाकर व्रत कथा का पाठ करें।
- सच्चे मन से आरती करें।
- जौ के सत्तू, घी और शक्कर का भोग लगाएं।
- रात को चंद्रमा के दर्शन करें और चंद्र देव को अर्घ्य दें।
- सत्तू ग्रहण करके अपना व्रत खोलें।
यह भी पढ़ें- क्या आप भी कजरी तीज पर रख रही हैं व्रत? थाली में जरूर शामिल करें सुहाग के ये 5 सामान, मिलेगा अखंड सौभाग्य
कजरी तीज कथा (Kajri Teej Katha in Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक निर्धन ब्राह्मण परिवार रहता था। एक बार उसकी पत्नी ने कजरी तीज का व्रत रखा। पत्नी ने पति से शाम को पूजा और पारण के लिए सत्तू मांगा। ब्राह्मण के पास धन नहीं था। इसलिए वह सत्तू के लिए एक दुकान में घुस गया। साहूकार ने उसे चोरी करते हुए पकड़ लिया। इसके बाद ब्राह्मण ने चोरी करने के पीछे की वजह बताई, जिससे साहूकार को उस पर दया आ गई।
साहूकार ने कहा कि यह सत्तू उसकी तरफ से बहन के लिए उपहार है। उसने सत्तू के साथ-साथ सुहाग का सामान (मेहंदी), गहने और कुछ धन देकर ब्राह्मण को खुशी-खुशी विदा किया। घर लौटकर ब्राह्मण की पत्नी ने उसी सत्तू से माता कजरी और चंद्र देव की सच्चे मन से पूजा-अर्चना की और व्रत पूरा किया।
यह भी पढ़ें- कजरी तीज के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल में क्यों मिलाते हैं कच्चा दूध? महादेव से है इसका खास कनेक्शन
यह भी पढ़ें- 31 अगस्त को है कजरी तीज, किन महिलाओं को नहीं रखना चाहिए यह व्रत? पढ़ें विशेष नियम
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
