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कजरी तीज के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल में क्यों मिलाते हैं कच्चा दूध? महादेव से है इसका खास कनेक्शन

Published: Sat, 22 Aug 2026 10:49 AM (IST)

कजरी तीज पर चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल में कच्चा दूध मिलाने का धार्मिक महत्व बताया गया है। यह ...और पढ़ें

जल में दूध मिलाने का महत्व (AI-Generated Image)

जल में दूध मिलाने का महत्व (AI-Generated Image)

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल कजरी तीज का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं और कुंवारी कन्याएं भी विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए व्रत रखती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से वैवाहिक जीवन सुखी रहता है और अच्छे वर की प्राप्ति होती है। यह व्रत निर्जला रखा जाता है। रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। अर्घ्य के जल में कच्चा दूध, चावल, गंगाजल आदि चीजें मिलाई जाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कजरी तीज के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल में कच्चा दूध क्यों मिलाया जाता है? अगर नहीं पता, तो आइए इस आर्टिकल में आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं।

बेहद पवित्र है कच्चा दूध

हिंदू धर्म में गाय के कच्चे दूध को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे पूजा-पाठ में भी शामिल किया जाता है। देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए कच्चे दूध का उपयोग बहुत शुभ माना जाता है।

शिव-पार्वती का आशीर्वाद

भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जल में कच्चा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए कजरी तीज के दिन अर्घ्य के जल में कच्चा दूध मिलाने का विशेष महत्व है।

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ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा को जल में दूध मिलाकर अर्घ्य देने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इससे जातक की मानसिक तनाव की समस्या दूर होती है और पति-पत्नी के बीच होने वाले बेवजह के क्लेश समाप्त होते हैं। साथ ही चंद्र दोष से भी मुक्ति मिलती है।

कब है कजरी तीज? (Kajri Teej 2026)

वैदिक पंचांग के अनुसार, कजरी तीज का पर्व 31 अगस्त को मनाया जाएगा।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत- 30 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 36 मिनट पर
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का समापन- 31 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।