Jitiya Vrat 2026: नहाय-खाय पर सास के लिए क्यों निकाला जाता है बायना, थाली में जरूर रखें ये चीजें
जितिया व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसमें सास के लिए बायना निकालने की परंपरा है। यह सम्मान और ...और पढ़ें

जितिया व्रत नहाय-खाय पर सास के बायने का महत्व ! (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जितिया व्रत को संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। खासतौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई परिवारों में इस व्रत से जुड़ी अलग-अलग पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं। इन्हीं में से एक है नहाय-खाय के दिन सास के लिए बायना निकालने की रस्म।
बायने को कई जगहों पर सीधा या भोजन के रूप में भी दिया जाता है। हालांकि, इसमें शामिल की जाने वाली चीजें हर परिवार की अलग-अलग रीति रिवाज पर निर्भर करती हैं। तो चलिए जानते हैं कि क्यों खास होता है इस व्रत पर सास के लिए बायना निकालना।
नहाय-खाय के दिन क्यों निकाला जाता है बायना?
जितिया व्रत की शुरुआत नहाय-खाय की रस्म से होती है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं स्नान करके सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं और इसके बाद व्रत की तैयारी शुरू करती हैं। कई परिवारों में नहाय-खाय के भोजन का एक हिस्सा सास के लिए अलग निकालकर सम्मानपूर्वक भेजने की परंपरा है। इसे बड़ों के प्रति सम्मान जताने का एक तरीका माना जाता है।
बायना में रखें सात्विक भोजन
अगर आपके परिवार में पका हुआ भोजन बायने के रूप में भेजने की परंपरा है, तो नहाय-खाय के दिन बनाए जाने वाले सात्विक भोजन को इसमें शामिल किया जा सकता है। इसमें नोनी का साग, मडुआ की रोटी और झिंगनी यानी सतपुतिया या लौकी की सब्जी जैसी पारंपरिक चीजें रखी जाती हैं। इस बात का ध्यान रखें कि भोजन ताजा और साफ-सुथरा हो।
फल और मिठाई भी करें शामिल
बायने में मौसमी फल और मिठाई भी रखी जा सकती है। फल को शुभ और सात्विक माना जाता है। आप सास के बायने में केले, सेब, अमरूद या अन्य मौसमी फल रख सकती हैं। इसके साथ घर में बनी मिठाई या परिवार में प्रचलित कोई पारंपरिक मिष्ठान्न भी शामिल किया जा सकता है।
सास के लिए रखें सुहाग की सामग्री
बायने में सास को सुहाग सामग्री और वस्त्र देने का भी रिवाज है। इसमें साड़ी, सिंदूर और अन्य सुहाग की चीजें रखी जा सकती हैं। कुछ परिवारों में सास को नए वस्त्र देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। वहीं कुछ बहुएं इस दिन सास को बायने के साथ पैसे भी देती हैं।
कच्चा बायना यानी सीधा क्या रखें?
कई घरों में भोजन के बजाय कच्चा बायना या सीधा देने की परंपरा होती है। इसमें जरूरत के अनुसार आटा, चावल, दाल और घी जैसी अन्न सामग्री सास को दी जाती हैं। इसके साथ दक्षिणा या पैसे भी रखे जा सकते हैं। बायने की मात्रा और सामग्री श्रद्धा के अनुसार होनी चाहिए।
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