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मंदिर के पत्थरों पर अपना नाम लिखवाना सही है या गलत? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया जवाब

Published: Tue, 15 Sep 2026 07:13 PM (IST)

प्रेमानंद जी महाराज ने मंदिर के पत्थरों पर नाम लिखवाने को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करना भगवान ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मंदिर के पत्थरों पर नाम लिखवाना धार्मिक रूप से अनुचित है।

  2. भगवान के नाम पर पैर पड़ना अनादर का कारण बनता है।

  3. प्रेमानंद जी महाराज ने इसे अज्ञानता का परिणाम बताया।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मंदिर को आस्था, श्रद्धा और भक्ति का पवित्र स्थान माना जाता है। किसी भी मंदिर के निर्माण में न जाने कितने लोगों का योगदान होता है और लोग अपने नाम को सदियों से मंदिर के माध्यम से जीवित रखना चाहते हैं। इसी वजह से कई बार लोग मंदिर के पत्थरों, दीवारों या अन्य हिस्सों पर अपना नाम अंकित करवाते हैं।

आपने अक्सर मंदिर की सीढ़ियों या मंदिर परिसर के भीतर किसी स्थान पर कोई नाम लिखा होगा। लोग इस नाम को पढ़ते हैं और मंदिर में ईश्वर के दर्शन के लिए आगे बढ़ जाते हैं। कई बार इन पत्थरों पर पैर भी पड़ जाता है, लेकिन लोग आगे बढ़ते रहते हैं।

मंदिर के किसी भी स्थान पर अपना नाम अंकित करवाना क्या धार्मिक दृष्टि से सही है या इससे व्यक्ति के पुण्य पर कोई असर पड़ता है? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है। ऐसा ही एक सवाल भक्त ने संत प्रेमानंद जी महाराज के सामने भी रखा और इस विषय पर उन्होंने भक्तों को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया है। आइए जानते हैं इस बारे में उन्होंने क्या जवाब दिया है।

नामों पर पैर पड़ने से अपराधबोध 

कई मंदिरों में संगमरमर के पत्थर लगे होते हैं और इन पत्थरों में किसी का नाम लिखा होता है, यह नाम उस व्यक्ति का हो सकता है जिसने मंदिर के लिए कुछ धनराशि दान में दी हो या फिर किसी तरह का कोई योगदान दिया हो। कई बार इन पर किसी स्वर्गवासी व्यक्ति की स्मृति में उसका नाम लिखा होता है।

कई नाम ऐसे भी होते हैं जो किसी भगवान से जुड़े होते हैं जैसे राम, श्याम या फिर कोई और नाम। कई बार हमारा पैर उस पर पड़ जाता है जिससे मन में अपराध बोध होने लगता है।

मुख्य रूप से यदि पत्थर पर 'राम' जैसे भगवान के पवित्र नाम लिखे हों, तब श्रद्धालु के मन में यह सवाल आना आम है कि कैसे ईश्वर का अपमान किया जा सकता है। इसी वजह से प्रेमानंद जी मंदिर में किसी स्थान पर भी नाम लिखवाने से मना करते हैं।

भगवान के नाम का अनादर

धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो कभी भी भगवान के नाम का अनादर नहीं होना चाहिए और इसी वजह से अगर कोई मंदिर में कहीं भी नाम लिखवाता है, तो वो पूरी तरह से गलत माना जाता है।

ऐसा करने से यदि उस स्थान पर गलती से भी पैर पड़ जाता है, तो ये ईश्वर का अपमान ही है। अगर किसी वजह से मंदिर में नाम अंकित हैं, तो आपको उस स्थान पर पैर रखने से बचना चाहिए और उस जगह से दूर हटकर ही निकल जाना चाहिए।

मंदिर में नाम लिखवाना अज्ञानता

प्रेमानंद ही महाराज बताते हैं कि लोग कई बार पंखे, दीवारों या सीढ़ियों पर अपना नाम लिख देते हैं या कोई पोस्टर लगा देते हैं। यह अज्ञानता वश ही करते हैं, क्योंकि भगवान के नाम से यदि किसी का नाम है और वह मंदिर के पत्थर में लिखा हुआ तो हम सनातन धर्मावलंबी कैसे उस पर पैर रख सकते हैं? मान लो राम लिखा है। हम राम पर जानबूझ कर पैर कैसे रख सकते हैं। इसलिए मंदिर में नाम लिखवाना ही ठीक नहीं है।

किसी को भी ऐसे स्थान पर अपना नाम अंकित नहीं करवाना चाहिए जहां आने-जाने वालों का पैर पड़ जाए। अगर आपका नाम किसी भगवान से जुड़ा है तो ऐसा बिलकुल न करें।

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