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जन्माष्टमी पर परिवार में मृत्यु होने पर क्या त्योहार मनाना छोड़ दें? प्रेमानंद जी महाराज ने दूर किया भ्रम

Published: Sun, 30 Aug 2026 03:51 PM (IST)

जन्माष्टमी पर परिवार में मृत्यु होने पर त्योहार मनाने या न मनाने के भ्रम को प्रेमानंद जी महाराज ने दूर ...और पढ़ें

जन्माष्टमी पर मृत्यु के नियम

जन्माष्टमी पर मृत्यु के नियम 

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 4 सितंबर को है। इस दिन लड्डू गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है और उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, लड्डू गोपाल की साधना करने से साधक को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है और प्रभु की कृपा बनी रहती है। प्राचीन परंपरा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि अगर जन्माष्टमी के दिन परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए, तो जब तक उसी दिन परिवार में किसी बच्चे का जन्म न हो जाए, तब तक उस त्योहार को मनाना बंद कर देना चाहिए।

इस विषय पर वृंदावन के संत श्री प्रेमानंद जी महाराज ने लोगों का भम्र को दूर किया है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार श्री प्रेमानंद जी महाराज जी के अनुसार बताते हैं कि जन्माष्टमी के दिन परिवार में मृत्यु होने पर क्या त्योहार मनाना बंद कर देना चाहिए?

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(Picture Credit: AI Generated)

जानिए क्या कहा प्रेमानंद जी महाराज ने?

प्रेमानंद जी से एक सवाल पूछा कि क्या यदि जन्माष्टमी के दिन परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए, तो उस त्योहार को तब तक मनाना बंद कर देना चाहिए जब तक कि उसी दिन परिवार में किसी बच्चे का जन्म न हो जाए।

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इसे प्रेमानंद जी महाराज ने पूरी तरह से गलत बताया है। उन्होंने कहा कि त्योहार मनाना बंद कर देना घोर सांसारिकता की सोच है। ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। महाराज जी ने कहा कि क्या जब तक जन्माष्टमी के दिन किसी बच्चे का जन्म नहीं होगा, तब तक प्रभु का जन्मोत्सव नहीं मनाया जाएगा? यह विचार पूरी तरह अनुचित है।

महाराज जी ने स्पष्ट किया कि यदि जन्माष्टमी के दिन परिवार में किसी की मृत्यु होती है, तो उस वर्ष 11 दिनों के सूतक काल तक शांति से शोक मनाया जाता है और केवल भगवान का नाम जप और भजन किया जाता है, लेकिन इसके बाद जब अगली जन्माष्टमी आएगी, तो उसे पूरे हर्षोल्लास और उत्सव के रूप में ही मनाया जाना चाहिए, त्योहार को हमेशा के लिए बंद नहीं करना चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।